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रांची/डेस्क: 1 फरवरी को देश के आम बजट का ऐलान होने वाला है. बजट से पहले जनता के मन में यह बात उमड़ रही है कि इस बार उन पर कौन-कौन सी राहत मिलेगी और कौन-कौन-सा बोझ पड़ने वाला है. खैर, इसके लिए तो अभी 1 फरवरी का इन्तजार करना पड़ेगा, लेकिन आगामी बजट को लेकर कुछ बातें छन कर अवश्य आ रही हैं, आम बजट 2026-27 से पूर्व केन्द्र सरकार के पास जो सुझाव आये हैं उनके आधार पर अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि आने वाले बजट में कुछ नया होना वाला है.
इस बार के बजट में जो कुछ भी नया होने वाला है, उसमें सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार केन्द्र सरकार का फोकस बड़े शहरों के बजाय छोटे शहरों पर हो सकता है. देश में टियर2 और टियर 3 माने जाने वाले शहरों के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को अर्थव्यवस्था के केन्द्र में लाने का प्रयास चल रहा है. केन्द्र सरकार चाहती है कि एमएसएमई जिसका अर्थव्यवस्था में योगदान 1.5 ट्रिलियन डॉलर है और जिसकी ग्रोथ रेट 10 प्रतिशत है, उसे टेक्नोलॉजी को जोड़ते हुए 18 प्रतिशत तक पहुंचाया जा सकता है. इस बार ऐसी नीति पर केंद्र सरकार काम कर रही है और उम्मीद है इस पर कोई बड़ा ऐलान कर सकती है. केन्द्र सरकार छोटे शहरों के लिए फैक्ट्रियाों और डिजिटल स्टार्टअप पर कोई बड़ा दांव लगाने का इरादा रखती है.
केन्द्र सरकार का यह मानना है कि देश में टियर 2 और टियर 3 शहरों पर बजट में फोकस करने रोजगार के अवसर को बढ़ायेगा. देश में टियर 2 और टियर 3 शहरों करीब एक लाख के स्टार्टअप हैं, केन्द्र सरकार इसे बढ़ा कर पांच लाख तक ले जाने के लिए एक स्कीम ला सकती है. जाहिर है जब इससे देश में स्टार्टअप की संख्या बढ़ेगी तो बड़ी संख्या में रोजगार के मौके भी पैदा होंगे.
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