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रांची/डेस्क: हाईवे पर खड़े ट्रक ने एक बार फिर हंसते-खेलते चार परिवारों की खुशियां छीन ली. झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की छोटी बेटी तृषा का आज गुरुवार अहले सुबह भीषण सड़क हादसे में निधन हो गया. जमशेदपुर में सोनारी थाना क्षेत्र के दोमुहानी मरीन ड्राइव पर हुए इस दर्दनाक हादसे में तृषा सिंह समेत चार लोगों की मौत हुई है, जिनमें दो युवक और दो युवती शामिल हैं. सभी एक कार में सवार थे. और पश्चिम बंगाल से आ रहे थे. इसी बीच देर रात करीब 2-3 बजे तेज रफ्तार कार ने सड़क पर खड़े ट्रक में पीछे से टक्कर मार दी. टक्कर इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई. और मौके पर ही चारों की मौत हो गयी.
बिना इंडिकेटर सड़क पर खड़ी थी ट्रक
इस हादसे के संबंध में पीसीआर डीएसपी जमशेदपुर मनोज ठाकुर ने बताया कि तकनीकी खराबी के कारण ट्रक को बीच सड़क पर खड़ा कर दिया गया था. बिना किसी लाइट या इंडिकेटर के बीच सड़क पर ट्रक खड़ा होने के कारण यह भीषण हादसा हुआ. ट्रक पर सिर्फ डाली के साथ पत्ता तोड़कर लगा दिया गया था, जो कि अंधेरे में बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रहा था.
सड़क पर खड़ा ‘मौत का ट्रक’!
उल्लेखनीय है कि रात के अंधेरे में बीच सड़क या सड़क किनारे बड़ी-बड़ी गाड़ियां खड़े रहने के कारण आये दिन इस तरह के हादसे होते रहते हैं. इस तरह के मामलों में ट्रक ड्राईवरों की सबसे बड़ी लापरवाही यही सामने आती है कि ये गाड़ियों को रात में बिना किसी इंडिकेटर या रेडियम पट्टी के कहीं भी सड़क किनारे खड़ी कर दते हैं, जिससे रात में ये गाड़ियाँ दिखती ही नहीं है. नतीजन रात के वक्तेत ज रफ्तार में आ रहे वाहन अक्सर सड़क किनारे खड़ी ट्रकों से टकरा जाती है.
हाईवे पर होने वाले हादसों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
हाईवे पर अक्सर होने वाले सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्ती दिखाई है. कोर्ट यह देख रहा है कि आखिर हाईवे पर ऐसी कौन सी व्यवस्थागत कमियां हैं, जिनकी वजह से आये दिन इस तरह के हादसे होते हैं.
नवंबर 2025 में राजस्थान के फलोदी में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद यह मामला कोर्ट पहुंचा. इस हादसे में भारत माला हाईवे पर मटोड़ा गांव के पास एक टेंपो ट्रैवलर सड़क पर खड़े ट्रेलर से टकरा गयी थी. इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई थी. इसी अवधि में तेलंगाना के रंगारेड्डी में भी एक बड़ा सड़क हादसा हुआ था. दोनों घटनाओं में 2 दिनों के भीतर 34 लोगों की जान गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसे सामान्य सड़क हादसा मानने के बजाय हाईवे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर समस्या माना और खुद संज्ञान लिया.
ट्रक और भारी वाहनों के लिए सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश
इसी बीच कुछ माह पूर्व ही 13 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे सुरक्षा को लेकर कई अंतरिम निर्देश दिए थे, जिसमें कोर्ट ने कहा कि कोई भी भारी या कमर्शियल वाहन नेशनल हाईवे की मुख्य सड़क या पक्के शोल्डर पर खड़ा नहीं हो सकता, जब तक वहां तय पार्किंग बे, ले-बाय या वे-साइड सुविधा न हो. ऐसे वाहनों पर ATMS, GPS वाली फोटो और ई-चालान के जरिए कार्रवाई करने को भी कहा गया था.
इतना ही नहीं कोर्ट ने हाईवे के किनारे अवैध कब्जों की पहचान और उन्हें हटाने के लिए सर्वे, ड्रोन सर्वे और जिला स्तर पर हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स बनाने के निर्देश भी दिए गए. साथ ही हादसों वाले ब्लैकस्पॉट की पहचान कर वहां लाइटिंग, स्पीड कैमरा और चेतावनी बोर्ड लगाने को कहा गया है.
हाईवे पर खड़ी गाड़ियां हादसे की बड़ी वजह- सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने हाईवे पर लगातार हो रहे सड़क हादसों के पीछे 2 बड़ी समस्याएं बताईं. इनमें पहला हाईवे के किनारे अवैध कब्ज़ा और दूसरा सड़क पर खड़े वाहन हैं.
इस पर NHAI ने बताया कि अवैध पार्किंग रोकने के लिए नियमित पेट्रोलिंग और निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं. लेकिन कोर्ट का सवाल है कि सिर्फ पेट्रोलिंग पर निर्भर रहने के बजाय टोल प्लाजा पर कैमरा और मॉनिटरिंग रूम बनाकर लगातार निगरानी क्यों नहीं की जा सकती. कोर्ट का मानना है कि हादसा होने के बाद कार्रवाई के बजाय पहले ही खतरा पकड़ने वाली व्यवस्था की जानी चाहिए. अगर हाईवे पर कोई भारी वाहन गलत जगह खड़ा है या सड़क की जमीन पर अवैध निर्माण हो रहा है, तो हादसा होने का इंतजार किये बिना उस पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे इस तरह के सड़क हादसों को कंट्रोल किया जा सकता है.
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