प्रमोद कुमार/न्यूज़11 भारत
बरवाडीह/डेस्क: छिपादोहर–गम्हरिया मुख्य मार्ग हाल ही में आई तेज बारिश के पानी में पूरी तरह बह गया था. सड़क टूट जाने से यहां के लगभग 50 परिवार प्रखंड मुख्यालय और छिपादोहर बाजार से कटकर रह गए थे. यह मार्ग स्थानीय लोगों के लिए जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि इसी से लोग बाजार, अस्पताल और सरकारी कामकाज के लिए मुख्यालय तक पहुंचते हैं. सड़क कट जाने से बच्चों की पढ़ाई, बीमारों का इलाज और रोज़मर्रा का जीवन प्रभावित हो गया. ग्रामीणों ने बताया कि सड़क टूटे हुए लगभग एक महीना बीत गया, लेकिन प्रखंड प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. मरम्मत के लिए न तो मशीनरी लगी और न ही कोई अस्थायी व्यवस्था की गई. लोगों ने कई बार गुहार भी लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.
आखिरकार ग्रामीणों ने स्वयं समस्या का हल खोजने का निर्णय लिया. आपसी सहयोग और चंदा इकट्ठा कर सड़क को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया. गांव के युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर मरम्मत का काम शुरू किया और कड़ी मेहनत से रास्ते को फिर से चलने योग्य बना दिया.
एकजुटता का उदाहरण
ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण उन्हें मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा. यह कार्य न केवल उनकी एकजुटता और संकल्प का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जब समुदाय साथ आता है तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव हो जाता है.
श्रमदान में शामिल लोग
इस नेक कार्य में राजेंद्र राम, मुकेश प्रसाद, टोटो भुइयां, अरविंद भुइयां, राहुल प्रसाद, बिहारी यादव, बिनोद सिंह, प्रदीप कुमार, मुकेश राम समेत कई ग्रामीणों ने श्रमदान कर महत्वपूर्ण योगदान दिया. सभी का कहना है कि अब उम्मीद है प्रशासन भी सक्रिय होकर सड़क को स्थायी रूप से दुरुस्त करेगा.
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