न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
राहुल कुमार / शेरघाटी : घर की टूटी मड़ैया को पक्का बनाने का सपना... बूढ़े मां-बाप की बुढ़ापे की लाठी बनने की उम्मीद... गर्भवती पत्नी के हाथों में आने वाले बच्चे के लिए खिलौने खरीदने की चाह... इन तमाम सपनों को लेकर दो महीने पहले भटकुरहा गांव का 24 वर्षीय गौतम कुमार मांझी चेन्नई गया था। उसे क्या मालूम था कि जिस गांव से वह हंसते हुए विदा हुआ है, उसी गांव में उसकी वापसी कंधों पर नहीं, बल्कि एंबुलेंस में होगी। रविवार को जैसे ही शेरघाटी प्रखंड की ढाबचिडैया पंचायत अंतर्गत भटकुरहा गांव में गौतम का पार्थिव शरीर पहुंचा, पूरे गांव में मातम छा गया। मां बेटे के शव से लिपटकर बेहोश हो गई। बूढ़े पिता रितेश मांझी की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। तीन माह की गर्भवती पत्नी बार-बार बेसुध हो रही थी। गांव की महिलाएं उसे संभाल रही थीं, लेकिन उसकी जुबान पर बार-बार सिर्फ एक ही सवाल था—"अब हमारे बच्चे को उसके पिता कौन कहेगा?"
ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी ने छीन ली जिंदगी
गौतम चेन्नई की एक स्टील (लोहा) कंपनी में मजदूरी करता था। परिवार की आर्थिक तंगी के कारण वह पहली बार चेन्नई गया था। इससे पहले हरियाणा में मजदूरी कर चुका था। मृतक के पिता रितेश मांझी ने बताया कि बेटे की तबीयत खराब थी। उसने फोन कर कहा था कि कंपनी से दो हजार रुपये मिले हैं और वह घर लौट रहा है। ट्रेन छूटने वाली थी। जल्दबाजी में ट्रेन पर चढ़ने के दौरान उसका हाथ फिसल गया। वह नीचे गिर पड़ा और दूसरी ट्रेन की चपेट में आ गया। मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। पिता बताते-बताते फफक पड़े। बोले, "सोच रहे थे बेटा आएगा तो इलाज कराएंगे, कुछ दिन घर रहेगा... लेकिन वह तो हमेशा के लिए छोड़कर चला गया।"
अभी शादी की मेहंदी भी फीकी नहीं पड़ी थी
गौतम की शादी वर्ष 2024 में हुई थी। शादी को अभी ज्यादा समय भी नहीं बीता था। पत्नी की मांग का सिंदूर उजड़ गया। वह तीन माह की गर्भवती है। उसके गर्भ में पल रहा बच्चा इस दुनिया में आने से पहले ही अपने पिता का साया खो चुका है। परिवार में सिर्फ दो भाई हैं। घर की आर्थिक जिम्मेदारी गौतम के कंधों पर थी। उसकी कमाई से ही बूढ़े माता-पिता का इलाज, घर का खर्च और परिवार की जरूरतें पूरी होती थीं। अब पूरे परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
हम नेता और मुखिया ने बढ़ाया मदद का हाथ
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रखंड अध्यक्ष महेश कुमार मांझी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को पूरे मामले से अवगत कराया गया। उनके हस्तक्षेप के बाद रेलवे अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन से संपर्क कर शव का पोस्टमार्टम कराया गया तथा पार्थिव शरीर को गांव तक पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि मृतक का श्रम कार्ड बना हुआ है। श्रमिक कल्याण योजना, पारिवारिक लाभ योजना तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू कराई जा रही है। भटकुरहा पंचायत के मुखिया मनोज मांझी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर हरसंभव सरकारी सहायता दिलाने का भरोसा दिया।