विकास कुमार/न्यूज11 भारत
रोहतास/डेस्क: सासाराम में राष्ट्रीय लोक मोर्चा में टूट के सवाल का उपेंद्र कुशवाहा ने जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में किसी प्रकार की टूट का कोई सवाल ही नहीं है. उन्होंने पत्रकारों को नसीहत देते हुए कहा कि आपके पास वाजिब सवाल ही नहीं है. जिसका जवाब दिया जाए. दो दिन पूर्व पटना में आयोजित दल के लिट्टी पार्टी में उनके तीन विधायक के शामिल नहीं होने के सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने जवाब देते हुए कहा कि यह कोई मुद्दा ही नहीं है. इसके बारे में चर्चा किया जाए. उन्होंने राष्ट्रीय लोक मोर्चा में टूट के सवाल को ही खारिज कर दिया तथा कहा कि इस तरह के सवाल बेवजह पूछे जा रहे हैं. उन्होंने अपने पार्टी में किसी प्रकार की टूट एवं विधायकों के असंतोष को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. बता दे की सासाराम के परिषद में वह आम लोगों से मुलाकात कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए यह बातें कही है. बता दे की राष्ट्रीय लोक मोर्चा के तीन विधायकों के असंतोष की बात सामने आ रही है. ऐसे में इन खबरों के बीच पहली बार उपेंद्र कुशवाहा पत्रकारों के सवालों का जवाब दिए हैं.
मनरेगा में होता था बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार - उपेन्द्र कुशवाहा
सासाराम स्थित परिसदन में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यह किसी से छिपा नहीं है कि मनरेगा में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता रहा है. मजदूरों के नाम पर फर्जी हाजिरी बनाई जाती थी और भुगतान उठा लिया जाता था, जबकि काम मशीनों से कराया जाता था.
उन्होंने कहा कि नए कानून में बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था कर दी गई है, जिससे अब फर्जी हाजिरी संभव नहीं होगी. यह कदम भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक सुधार है.
उपेंद्र कुशवाहा ने बताया कि इस अधिनियम के तहत ग्रामीण मजदूरों को मिलने वाले काम के दिनों की संख्या भी बढ़ाई गई है. पहले जहां 100 दिन रोजगार का प्रावधान था, अब उसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जिससे मजदूरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना है और नए प्रावधानों से इसका सकारात्मक असर जमीन पर दिखेगा.
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