न्यूज 11 भारत/पटना डेस्क: बाल सुधार गृह (पर्यवेक्षण गृह) में विचाराधीन 16 वर्षीय किशोर रुस्तम राईन की संदेहास्पद मौत का मामला अब पूरी तरह गरमा गया है। घटना के विरोध और मृतक को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर भभुआ शहर की सड़कों पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। आक्रोशित नागरिकों और परिजनों ने छावनी मोहल्ले से लेकर शहर के व्यस्ततम एकता चौक तक विशाल कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान लोगों ने सुधार गृह प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कर दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग उठाई।
कैंडल मार्च में भभुआ के पूर्व नगर परिषद सभापति विकास तिवारी उर्फ बबलू तिवारी, पूर्व उपसभापति अमजद अली, वार्ड पार्षद बदरुद्दीन राईन, महताब अंसारी, अल्पसंख्यक नेता असलम अंसारी समेत भारी संख्या में स्थानीय महिलाएं, युवा अन्य लोग शामिल हुए। नेताओं ने दो टूक कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
कोर्ट में पेशी के महज कुछ ही घंटे बाद निकली अर्थी
भभुआ वार्ड नंबर 10 छावनी मोहल्ला निवासी रुस्तम राईन को 20 अगस्त से चैनपुर स्थित बाल सुधार गृह में निरुद्ध था। 10 सितंबर को उसे नियमित पेशी के लिए भभुआ सिविल कोर्ट लाया गया था। परिजनों का कहना है कि दोपहर में कोर्ट परिसर में मुलाकात के वक्त रुस्तम बिल्कुल स्वस्थ और सामान्य था। लेकिन पेशी के बाद सुरक्षित सुधार गृह पहुंचने के कुछ ही घंटों के भीतर अचानक उसकी मौत की खबर आ गई। आनन-फानन में उसे सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
गले पर गहरे काले-नीले निशान
सदर अस्पताल पहुंचे परिजनों ने जब शव देखा तो उनके होश उड़ गए। परिजनों का दावा है कि मृतक के गले पर गला घोंटने जैसे गहरे काले और नीले निशान साफ मौजूद थे। इसके अलावा सुधार गृह के कर्मचारियों के बयानों ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। जहां सुधार गृह के इंचार्ज ने पहले दावा किया कि खाना खाते वक्त तबीयत बिगड़ी, वहीं कुछ कर्मी शौचालय में बेहोश मिलने की बात कहते रहे। परिजनों का सीधा आरोप है कि सोची-समझी साजिश के तहत सुधार गृह के भीतर ही रुस्तम का गला दबाकर उसकी जान ली गई है।
सुधार गृह इंचार्ज समेत सात पर हत्या की प्राथमिकी
मामले की गंभीरता को देखते हुए चैनपुर थाने में मृतक के पिता की तहरीर पर बाल सुधार गृह के इंचार्ज अजय कुमार, कर्मी प्रवीन कुमार, अखिलेश कुमार सिंह, पीयूष कुमार, केस के सूचक मुन्ना प्रजापति और बबीता देवी समेत 7 नामजद व अन्य अज्ञात कर्मियों के खिलाफ हत्या एवं आपराधिक साजिश की संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
प्रशासन ने पूरे मामले की न्यायिक जांच शुरू करा दी है। वहीं शहर में एहतियात के तौर पर संवेदनशील इलाकों और मृतक के घर के बाहर दंडाधिकारी व पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।