न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार की राजधानी पटना और उसके आसपास के जिलों के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बेहद ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने बहुप्रतीक्षित 'पटना रिंग रोड परियोजना' के आठवें और अंतिम खंड को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही करीब दो दशक (21 साल) पुराना यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब पूरी तरह धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। लगभग 150 किलोमीटर लंबी इस पूरी रिंग रोड परियोजना पर केंद्र सरकार करीब 16,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करने जा रही है, जो बिहार के आर्थिक और औद्योगिक विकास को एक नई रफ्तार देगा।
2005 में बुना गया था सपना, दो दशक बाद अंतिम पड़ाव पर
आपको बता दें कि इस महापरियोजना की नींव वर्ष 2005 में रखी गई थी। इसके बाद तकनीकी सर्वेक्षण, जमीन के नक्शे और प्रशासनिक औपचारिकताओं को पूरा करने में कई साल लग गए। लंबे इंतजार के बाद अब यह महत्वाकांक्षी योजना अपने आखिरी और निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। इसे महज एक सड़क निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि पटना, वैशाली और सारण (छपरा) जिलों के समग्र विकास के लिए एक 'गेम चेंजर' माना जा रहा है।
आठ हिस्सों में बंटा है प्रोजेक्ट, अंतिम फेज पर लगनी थी मुहर
इस विशाल रिंग रोड को समय पर और सुचारू रूप से पूरा करने के लिए इसे कुल आठ अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया था। इनमें से कई किलोमीटर के हिस्सों पर काम पहले ही पूरा हो चुका है या अंतिम चरण में है। केवल आठवें चरण की मंजूरी अटकी हुई थी, जिसे अब नई दिल्ली से हरी झंडी मिल चुकी है। इसके बाद अब जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया शुरू होने और काम तेज होने की उम्मीद है।
दीघवारा से सराय के बीच बनेगा 1500 करोड़ का अंतिम कॉरिडोर
परियोजना का आठवां और अंतिम हिस्सा सारण के दीघवारा से वैशाली के सराय के बीच तैयार किया जाएगा। करीब 30 किलोमीटर लंबे इस खास एक्सप्रेसवे खंड को बनाने में 1500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। यह हिस्सा गंगा नदी के उत्तरी छोर पर स्थित वैशाली और सारण जिलों के बीच कनेक्टिविटी को बेहद मजबूत करेगा। इस रूट के लिए होने वाले जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) के कुल खर्च का 50 फीसदी हिस्सा बिहार सरकार अपनी जेब से देगी।
इन बड़े शहरों और इलाकों को सीधे जोड़ेगी यह रिंग रोड
पटना रिंग रोड का पूरा जाल कन्हौली, शेरपुर, सराय, कच्ची दरगाह, बिदुपुर, चकसिकंदर, दीघवारा और दीदारगंज जैसे बड़े और विकासशील क्षेत्रों को एक सूत्र में पिरोएगा। इससे न सिर्फ स्थानीय लोगों का सफर आसान होगा, बल्कि सुदूर जिलों या दूसरे राज्यों से आने वाले बड़े मालवाहक ट्रकों को पटना शहर के अंदर की संकरी और व्यस्त सड़कों पर आने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
पटना को मिलेगी महाजाम से मुक्ति, सफर होगा सुपरफास्ट
राजधानी पटना इस समय वाहनों के बढ़ते दबाव और भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रही है। इस रिंग रोड के पूरी तरह चालू हो जाने के बाद भारी और लंबी दूरी के वाहन शहर के बाहर से ही बाईपास होकर निकल जाएंगे। इससे पटना के मुख्य बाजारों और रिहायशी इलाकों की सड़कों पर गाड़ियों का दबाव बहुत कम हो जाएगा और लोगों को रोज-रोज के जाम के नरक से बड़ी राहत मिलेगी।
दिल्ली-NCR की तर्ज पर चमकेगा पटना और आसपास का इलाका
इस रिंग रोड के बनने के बाद पटना का विस्तार दिल्ली-एनसीआर (NCR Model) की तर्ज पर होने की संभावना जताई जा रही है। यह मेगा रिंग रोड बिहार के 7 नेशनल हाईवे (NH) और 5 प्रमुख स्टेट हाईवे (SH) को आपस में जोड़ने का एक बड़ा जंक्शन बनेगी। बेहतर रोड कनेक्टिविटी के कारण पटना के साथ-साथ वैशाली और सारण जिलों में नए उद्योगों, लॉजिस्टिक्स पार्क और व्यापारिक केंद्रों का तेजी से विकास होगा।