न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क: बिहार की राजधानी के खगौल इलाके में 15 किलो सोने (कीमत 20 करोड़ रुपये) की सनसनीखेज लूट का खुलासा अब अंतिम चरण में है। इस वारदात को अंजाम देने वाले शातिरों ने फिल्म 'स्पेशल-26' की तर्ज पर खुद को कस्टम अधिकारी बताया था, लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक जांच ने उनके हर कदम को रिकॉर्ड कर लिया है।
82 मोबाइल नंबरों से खुला 'क्राइम मैप'
पुलिस जांच का मुख्य आधार मोबाइल डंप डेटा बना है। घटनास्थल से लेकर उन स्थानों तक, जहाँ बदमाशों ने अपनी बाइक और कार छोड़ी थी, पुलिस ने सघन तकनीकी जांच की। महेश और प्रिंस (पीड़ित कर्मचारी) के मोबाइल लोकेशन के साथ सक्रिय रहे 82 संदिग्ध मोबाइल नंबरों को चिन्हित किया गया। डेटा एनालिसिस के बाद इनमें से 5 ऐसे नंबर सामने आए, जो बार-बार लुटेरों के लोकेशन के साथ मैच कर रहे थे। इसी डिजिटल सबूत ने अपराध की पूरी कुंडली खोल दी है।
कस्टम अधिकारी बनकर दिया चकमा
यह वारदात तब हुई जब गुजरात के राजकोट के कारोबारी सुनील भाई के कर्मचारी महेश और प्रिंस अहमदाबाद-सहरसा एक्सप्रेस से दानापुर स्टेशन पहुँचे थे। लुटेरों ने कस्टम विभाग के अधिकारी होने का नाटक किया और चेकिंग के नाम पर गहनों से भरा बैग अपने कब्जे में ले लिया। लूट के दौरान बदमाशों के मोबाइल फोन चालू थे, जो अब पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग साबित हो रहे हैं।
लाइनर की पहचान, दिल्ली-गुजरात में घेराबंदी
पुलिस ने न केवल मुख्य लुटेरों बल्कि वारदात की रेकी करने वाले 'लाइनर' की भी पहचान कर ली है। एसआईटी (SIT) की टीम ने ठोस इनपुट के आधार पर दिल्ली और गुजरात के लिए उड़ान भरी है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों की पूरी चेन का पता चल चुका है। बदमाशों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
गिरफ्तारी के करीब पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य और लाइनों की पहचान के बाद अब सिर्फ बदमाशों की गिरफ्तारी बाकी है। जल्द ही इस पूरे गिरोह को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। पुलिस की टीमें लगातार उनका पीछा कर रही हैं और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी है।