न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क: बिहार के शासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की मॉनिटरिंग व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक करने की तैयारी कर ली गई है. सूबे के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने घोषणा की है कि अब शिक्षकों की उपस्थिति और उनकी मुस्तैदी को परखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा लिया जाएगा. उन्होंने साफ लफ्जों में आगाह किया है कि शिक्षण अवधि के दौरान बिना पूर्व अनुमति के विद्यालय परिसर से बाहर कदम रखना अब शिक्षकों की जेब और नौकरी दोनों पर भारी पड़ सकता है.
चहारदीवारी लांघी तो लगेगा जुर्माना: मंत्री ने दी सख्त चेतावनी
एक सार्वजनिक मंच से बोलते हुए शिक्षा मंत्री ने कड़े नियमों का खाका पेश किया. उन्होंने स्पष्ट उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि कोई शिक्षक अध्यापन के समय स्कूल की बाउंड्री से बाहर जाता है—यहाँ तक कि टॉयलेट जाने के लिए भी कैंपस छोड़ता है—तो उसकी आधे दिन की उपस्थिति काटी जा सकती है. वहीं, यदि कोई शिक्षक बिना बताए एक घंटे से अधिक समय तक गायब रहता है, तो उसे उस पूरे दिन के लिए अनुपस्थित (Absent) मान लिया जाएगा.
"शिक्षकों के कंधों पर नए बिहार की नींव": कर्तव्यनिष्ठा की अपील
शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों से अपनी ड्यूटी को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाने की भावुक अपील भी की. उन्होंने कहा कि बिहार की भावी पीढ़ी का भाग्य क्लासरूम में ही तय होता है और सरकारी शिक्षा तंत्र की सफलता अध्यापकों की निष्ठा पर टिकी है. मंत्री ने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे राष्ट्र निर्माता हैं, इसलिए बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
राहत की खबर: 20 दिनों में सुलझेंगी शिक्षकों की समस्याएं, सिंगल विंडो सिस्टम लागू
कड़ाई के बीच शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के शिक्षकों को एक बड़ी सौगात भी दी है. उन्होंने आश्वस्त किया कि शिक्षकों की पुरानी मांगों—जैसे एसीपी (ACP), सैलरी में गड़बड़ी और प्रमोशन (प्रमोशन से जुड़े अटके मामले)—को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा. इसके लिए विभाग ने 'सिंगल विंडो सिस्टम' की शुरुआत की है, जिसके तहत हर शिकायत का निवारण अधिकतम 20 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा. तय वक्त में काम न करने वाले लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.