न्यूज 11 भारत/बिहार डेस्क
राहुल कुमार/ शेरघाटी: आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता को लेकर मंगलवार को अनुमंडलीय न्यायालय, गया में न्यायिक पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। न्यायिक पदाधिकारियों को अपने-अपने न्यायालयों में लंबित एवं लोक अदालत में निस्तारण योग्य मामलों को चिह्नित कर समय रहते आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया। साथ ही संबंधित पक्षकारों को समय पर नोटिस उपलब्ध कराने और उन्हें लोक अदालत में उपस्थित होने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया।
बैठक का आयोजन बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (बालसा) के निर्देश तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गया राकेश कुमार सिंह के आदेशानुसार किया गया। बैठक की अध्यक्षता जिला जज प्रथम-सह-अध्यक्ष, अनुमंडलीय विधिक सेवा समिति, गया लवकुश कुमार ने की। बैठक में राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए न्यायिक स्तर पर की जाने वाली तैयारियों की समीक्षा की गई और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
पक्षकारों को समय पर उपलब्ध कराएं नोटिस
बैठक में जिला जज प्रथम ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का निष्पादन कराने के लिए तैयारी पहले से पूरी कर लेना जरूरी है। न्यायिक पदाधिकारी अपने न्यायालयों में ऐसे मामलों की पहचान करें, जिनका निस्तारण पक्षकारों की आपसी सहमति और समझौते के आधार पर संभव है। ऐसे मामलों में संबंधित पक्षकारों को समय पर नोटिस उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें लोक अदालत की तिथि और इसके माध्यम से विवाद के समाधान की जानकारी मिल सके।
उन्होंने कहा कि केवल मामलों को चिह्नित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पक्षकारों को लोक अदालत के उद्देश्य और इसके लाभ की जानकारी देना भी जरूरी है। पक्षकारों से संवाद स्थापित कर उन्हें आपसी समझौते के लिए प्रेरित किया जाए, जिससे 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का अंतिम रूप से निस्तारण कराया जा सके।
प्री-सिटिंग के माध्यम से समझौते का प्रयास
बैठक में प्री-सिटिंग पर विशेष रूप से जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लोक अदालत से पहले ही संबंधित मामलों के पक्षकारों के बीच समझौते की संभावना तलाशने का प्रयास किया जाए। प्री-सिटिंग के दौरान दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की दिशा में पहल की जाए। इससे लोक अदालत के दिन मामलों के निस्तारण में आसानी होगी और अधिक संख्या में मामलों का समाधान संभव हो सकेगा।
जिला जज प्रथम ने कहा कि आपसी सहमति से विवाद का समाधान होने से दोनों पक्षों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है। इससे पक्षकारों का समय और धन दोनों बचता है। वहीं, न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में भी राष्ट्रीय लोक अदालत की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सरल और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना उद्देश्य
बैठक में कहा गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत आम लोगों को सरल, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है। इसमें पक्षकारों की सहमति से मामलों का समाधान कराया जाता है। ऐसे मामलों में पक्षकारों को लंबे समय तक न्यायालय का चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। विवाद का समाधान आपसी सहमति से होने के कारण दोनों पक्षों के बीच संबंध भी सामान्य बनाए रखने में मदद मिलती है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लोक अदालत में निस्तारण योग्य मामलों की पहचान के साथ-साथ पक्षकारों को इसकी प्रक्रिया और लाभ की जानकारी दी जाए। न्यायिक पदाधिकारियों से कहा गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए निर्धारित लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पूरी गंभीरता के साथ तैयारी करें।
12 सितंबर को अधिक से अधिक मामलों के समाधान की अपील
जिला जज प्रथम ने आम लोगों से अपील की कि 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। जिन मामलों का निस्तारण आपसी समझौते के आधार पर संभव है, उनके पक्षकार लोक अदालत में उपस्थित होकर विवाद का समाधान कराने की दिशा में पहल करें। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से विवाद का निपटारा कराने से पक्षकारों को समय और आर्थिक खर्च की बचत होती है तथा उन्हें लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है।
उन्होंने न्यायिक पदाधिकारियों को भी निर्देश दिया कि लोक अदालत में आने वाले पक्षकारों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक मामलों का सहज और प्रभावी तरीके से निस्तारण हो सके।
बैठक में मौजूद
बैठक में अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम राजेश कुमार सिंह, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वितीय प्रीति कुमारी, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी तृतीय संजय कुमार, अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी आलोक कुमार सहित प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के सभी न्यायिक दंडाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों, निस्तारण योग्य मामलों को चिह्नित करने, पक्षकारों को नोटिस देने, प्री-सिटिंग कराने तथा अधिक से अधिक मामलों के त्वरित निष्पादन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।