अभिषेक राज/न्यूज11 भारत
गया/डेस्क: जिले के गया शहर स्थित एपी कॉलोनी में एक निजी स्कूल के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मीडिया से बातचीत के दौरान ब्राह्मणवाद, शिक्षा व्यवस्था, अरविंद केजरीवाल प्रकरण और राज्यसभा सीटों को लेकर बेबाक बयान दिए.
ब्राह्मणवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में मांझी ने स्पष्ट कहा कि ब्राह्मण एक जाति का विषय है, जबकि ब्राह्मणवाद एक विचारधारा है. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में जाति जन्म से नहीं, बल्कि कर्म के आधार पर तय होती थी.
मांझी ने कहा, “वही ब्राह्मण पूज्य है जो ब्रह्म को जानता है, लेकिन ब्राह्मणवाद के नाम पर आडंबर, छुआछूत और लोगों को मूर्ख बनाना गलत है और इसका विरोध होना चाहिए.”
सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से इस सिस्टम में सुधार की मांग कर रहे हैं. मांझी ने सरकारी शिक्षकों से हाथ जोड़कर अपील करते हुए कहा कि 60 हजार से सवा लाख रुपये तक वेतन लेने के बावजूद सरकारी स्कूलों में बच्चों को वह गुणवत्ता नहीं मिल पा रही है, जो 25 से 30 हजार वेतन पाने वाले निजी स्कूलों के शिक्षक दे रहे हैं.
उन्होंने कहा, “सभी शिक्षक खराब नहीं हैं, करीब 10 प्रतिशत शिक्षक अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन बहुसंख्यक को आत्ममंथन और सुधार की जरूरत है.”
उन्होंने सरकार से भी आग्रह किया कि शिक्षा पर रिकॉर्ड बजट देने के बावजूद उसका ठोस और सकारात्मक परिणाम जमीन पर दिखना चाहिए.
अरविंद केजरीवाल से जुड़े सवाल पर मांझी ने कहा कि किसी पर राजनीतिक हमला करना गलत है, लेकिन यह भी सच्चाई है कि आरोपों के बाद चार्जशीट, गिरफ्तारी और जेल की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी आधार पर हुई थी.
उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं को भारत सरकार का धन्यवाद देना चाहिए, क्योंकि एनडीए सरकार ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखा है. “अगर सरकार चाहती तो शायद इतनी आसानी से रिहाई नहीं होती,” उन्होंने जोड़ा.
राज्यसभा सीटों के सवाल पर मांझी ने साफ किया कि वे नाराज नहीं हैं, लेकिन यह बात बार-बार याद दिलाते रहेंगे कि लोकसभा की दो और राज्यसभा की एक सीट का वादा किया गया था.
लोकसभा की एक सीट मिलने पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गया के मतदाताओं का आभार जताया. उन्होंने कहा, “राज्यसभा सीट हम मांगेंगे नहीं, देना है तो वचन के आधार पर दीजिए, नहीं देना है तो भी ठीक, लेकिन वादा तो वादा होता है.”
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