न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - बिहार की राजनीति में आने वाले एक-दो दिन बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं। राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ गई हैं और अंदरखाने रणनीति बनाने का दौर जारी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव राज्य की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, 13 अप्रैल को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के विधायक दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक मुख्यमंत्री Nitish Kumar की अध्यक्षता में होगी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा विधायक दल के नए नेता का चयन करना है। माना जा रहा है कि इसी बैठक में आगे की राजनीतिक रूपरेखा भी तय होगी और सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
14 अप्रैल को इस्तीफा दे सकते हैं नीतीश कुमार
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो विधायक दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है। यदि ऐसा होता है, तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि नीतीश कुमार लंबे समय से राज्य की राजनीति का केंद्रीय चेहरा रहे हैं।
14-15 अप्रैल को नई सरकार का गठन संभव
सूत्रों के मुताबिक, अगर सभी घटनाक्रम तय योजना के अनुसार आगे बढ़ते हैं, तो 14 या 15 अप्रैल तक बिहार में नई सरकार का गठन हो सकता है। नई सरकार के शपथ ग्रहण को लेकर भी तैयारियां शुरू होने की खबरें हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी संभावित बदलावों को देखते हुए हलचल देखी जा रही है।
नए नेतृत्व को लेकर कयास तेज
नई सरकार के नेतृत्व को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। NDA के भीतर विभिन्न नामों पर चर्चा चल रही है, लेकिन अंतिम निर्णय विधायक दल की बैठक में ही लिया जाएगा। सभी की नजरें अब 13 अप्रैल की बैठक पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।
बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत संभव
यदि सत्ता परिवर्तन होता है, तो इसे बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जाएगा। इससे न सिर्फ सरकार की कार्यशैली में बदलाव आ सकता है, बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम जनता की भी नजर बनी हुई है।
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