Bihar Politics : बिहार में टूट गया महागठबंधन ! आखिर क्या चाहते हैं तेजस्वी ?

बिहार में महागठबंधन के भीतर दरार और गहराने से सियासी हलचल तेज हो गई है।<br/>कांग्रेस और राजद के बयानों के बाद गठबंधन की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

By : sawan kumar
Bihar Politics : बिहार में टूट गया महागठबंधन ! आखिर क्या चाहते हैं तेजस्वी ?

बिहार में टूट गया महागठबंधन ! आखिर क्या चाहते हैं तेजस्वी ?

न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क

खास रिपोर्ट/  नीलकमल :  बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। महागठबंधन के भीतर बढ़ती तल्खी और नेताओं के बयानों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कभी एकजुट होकर एनडीए को चुनौती देने वाला यह गठबंधन अब अंदरूनी मतभेदों और आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजरता दिख रहा है। राजद और कांग्रेस के नेताओं के अलग-अलग तेवरों ने गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनावी हार के बाद से ही जो दरारें दिखने लगी थीं, वे अब खुलकर सामने आने लगी हैं, जिससे बिहार की सियासत में नए समीकरण बनने की चर्चा जोर पकड़ रही है। अब ये कहना गलत नहीं होगा कि बिहार में महागठबंधन नामक कोई चीज बची ही नहीं है । ऐसा हम नहीं कहते बल्कि कांग्रेस और राजद के हालिया ताजा बयान इस बात को साबित कर रहे हैं। आईये समझते हैं महागठबंधन का पूरा समीकरण -  

हाईलाइट्स

  • बिहार में टूट गया महागठबंधन !
  • गठबंधन धर्म निभाते निभाते सिकुड़ गई आरजेडी : भोला यादव
  • केरल में एलडीएफ के साथ मिलकर लड़ रहे चुनाव : तेजस्वी यादव
  • कांग्रेस को अपने दम पर होना पड़ेगा खड़ा : शकील अहमद खान

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महा गठबंधन को मिली करारी हार के बाद से ही दरार दिखनी शुरू हो चुकी थी। 14 नवंबर के बाद जैसे जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे दरार और चौड़ी होती चली गई। आज के हालात ऐसे हैं चौड़ी हो चुकी दरार अब खाई में तब्दील हो चुकी दिखती है।

दोस्ती निभाने के चक्कर में सब कुछ गवां दिया

राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी और पार्टी के वरिष्ठ नेता, भोला यादव का कहना है कि उनकी पार्टी ने ईमानदारी पूर्वक गठबंधन धर्म का निर्वहन किया। लेकिन महागठबंधन में शामिल कई दल ऐसे थे जिन्होंने सिर्फ अपना फायदा देखा गठबंधन का नहीं। भोला यादव का कहना है कि हमारे नेता सब कुछ देख रहे थे और समझ भी रहे थे। महागठबंधन में बड़े दल के रूप में मौजूद राष्ट्रीय जनता दल ने घटक दलों के हर नखरे और दबाव को भी सहने का काम किया। भोला यादव ने कहा कि महागठबंधन के भीतर मौजूद सभी दल मिलकर चुनाव नहीं लड़ पाए। कांग्रेस के साथ फ्रेंडली फाइट या अन्य दलों के अपने एजेंडा पर चुनाव प्रचार और लोगों के बीच सिर्फ अपना पैठ बढ़ाने की होड़ मची रही। जबकि राष्ट्रीय जनता दल का नेतृत्व कर रहे तेजस्वी यादव सभी दल को साथ लेकर चल रहे थे। यही वजह रही की गठबंधन धर्म निभाते निभाते राष्ट्रीय जनता दल जो 2020 के  विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी वह 2025 में सिकुड़ कर रह गई।

बिहार में दोस्त केरलम में दुश्मन

राष्ट्रीय जनता दल पश्चिम बंगाल को छोड़ केरलम में भाग्य आजमाने पहुंची है। राजद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव केरल गए थे। हालांकि केरल में उन्होंने बिहार को लेकर जो बयान दिया बिहार गरीब राज्य है। उसकी भर्त्सना सभी पार्टियों ने की। केरल में मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि बिहार के महागठबंधन में कांग्रेस के साथ लेफ्ट भी शामिल है। आपको बता दे की राष्ट्रीय जनता दल केरल के एलडीएफ यानी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। जबकि यूडीएफ यानी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में कांग्रेस शामिल है। इसका साफ मतलब हुआ कि राष्ट्रीय जनता दल जिन तीन सीट पर केरल में चुनाव लड़ रही है वह कांग्रेस के विरोध में ही होगा। इस इस तरह से भी समझा जा सकता है कि बिहार का दोस्त केरल में बड़ा दुश्मन बन चुका है।

एकला चलो की राह पर कांग्रेस : शकील अहमद खान

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का परिणाम आते ही महागठबंधन के भीतर खलबली मच गई थी। 2020 में 19 सीट जीतने वाली कांग्रेस मात्र 6 सीट पर सीमित रह गई। दिसंबर के महीने में ही कांग्रेस ने इसके लिए खुलकर तो नहीं बल्कि इशारों में यह जाता दिया कि राजद की वजह से कांग्रेस इस हालत में पहुंच गई। तब बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान ने यह बयान देकर सभी को चौंका दिया था कि कांग्रेस को अब आगे का रास्ता अकेले तय करना चाहिए। महागठबंधन में रहने के बावजूद शकील अहमद खान का यह बयान खासा मायने रखता था। महागठबंधन को लेकर इस तरह के बयान देने पर जिस शकील अहमद खान पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। कांग्रेस के दिल्ली नेतृत्व ने कार्रवाई की बात तो छोड़िए उन्हें रिवॉर्ड देते हुए पश्चिम बंगाल होने वाले चुनाव के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त कर दिया। इसे समझना मुश्किल नहीं है कि बिहार में भले ही कागज पर महागठबंधन दिखाई दे रहा हो। लेकिन हकीकत्न बिहार में गठबंधन तार तार हो चुका है।

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