राहुल कुमार/न्यूज11 भारत
शेरघाटी/डेस्क: अनुमंडलीय अस्पताल सह ट्रॉमा सेंटर शेरघाटी में रविवार को हुए नवजात की मौत के बाद जहां स्वजनों ने बवाल काटा वहीं अस्पतालीय व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है. अस्पताल द्वारा सुरक्षित प्रसव का दावा चिकित्साकर्मियों के लिए सवालिया निशान लगा दिया है. स्वजनों ने प्रसव में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर अस्पताल व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर प्रशासन के समक्ष चुनौती प्रस्तुत कर दिया है. स्वजनों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही के कारण नवजात की जान चली गई. नवजात की मां की पहचान शेरघाटी गोलबाजार जेपी चौक मोहल्ला निवासी धनंजय कुमार की पत्नी रिमझिम कुमारी के रूप में हुई है.
स्वजनों ने बताया कि अहले सुबह भोर में प्रसव पीड़ा होने पर स्वजन रिमझिम कुमारी को अस्पताल में भर्ती कराया गया. नर्स ने भर्ती कर लिया दर्द की दवा मंगाकर खिलाने के उपरांत दर्द शांत करने की बात कहकर अपने कक्ष में चली गईं. कुछ देर राहत के बाद जब दर्द दोबारा बढ़ा तो स्वजन बार-बार नर्स को बुलाते रहे, मगर समुचित ध्यान नहीं दिया गया.
सुबह लगभग 7:30 बजे ड्यूटी पर तैनात डॉ. भास्कर अस्पताल पहुंचे. आरोप है कि उन्होंने मरीज को बिना ठीक से जांचे ही ऊपर-ऊपर देखकर लौट गए. इसी बीच सुबह लगभग सवा आठ बजे प्रसूता की हालत गंभीर हो गई. डॉक्टर की अनुपस्थिति में नर्स द्वारा प्रसव कराया गया, लेकिन कथित लापरवाही के कारण नवजात का सिर देर तक फंसा रहा. बाद में डॉक्टर पहुंचे और बच्चे को बाहर निकाला गया, पर तब तक काफी देर हो चुकी थी. फिर नवजात को मृत घोषित कर दिया गया.
इधर डॉ भास्कर ने आरोप को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि मरीज को काफी देर से लाया गया. किसी प्रकार प्रसूता को बचाया गया. जबकि बच्चा मृत निकाला गया. इधर स्वजन बताते हैं कि नाभि काटने तक के लिए अस्पताल में धागा तक उपलब्ध नहीं था. पट्टी से नाभि काटने की तैयारी हो रही थी, तब स्वजन ने बाहर से धागा मंगवाकर व्यवस्था की. स्वजनों ने घटना की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी डॉक्टर व स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि अस्पताल में लापरवाही की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होती. उक्त अस्पताल नाम का ट्रॉमा सेंटर है.
नवजात की मौत के बाद एक बार फिर शेरघाटी अनुमंडलीय अस्पताल की व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर ट्रॉमा सेंटर केवल नाम का ही रहना है तो इसकी घोषणा का क्या औचित्य है
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