गंगा के वेग की रफ्तार.. क्या बंगाल के हुगली में रहेगी बरकरार! बिहार के बाद बंगाल जीतना कितना कठिन?

गंगा के वेग की रफ्तार.. क्या बंगाल के हुगली में रहेगी बरकरार! बिहार के बाद बंगाल जीतना कितना कठिन?

ममता ने 14 साल सत्ता में रहने के बाद भी अपने आप को जमी हुई नेता की तरह कभी पेश नहीं किया

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न्यूज11 भारत
रांची/डेस्कः-
बिहार में मिली जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ता काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं. पार्टी सोच रही है कि उन्हे अब बंगाल में भी सफलता मिल जाएगी. लेकिन बंगाल फतह करना इतना आसान नहीं होगा. बंगाल के मुस्लिम वोटर, टीएमसी की संगठनात्मक पकड़ व ममता की करिश्माई छवि बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है. बता दें कि बंगाल का चुनाव कुछ ही महीनों में होने वाली है. बिहार जीतने के बाद पार्टी को पूरा भरोसा है कि अब वो बंगाल भी जीत कर ममता के किला को बेदखल कर देगी. नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जैसे गंगा बिहार से प्रवेश कर के बंगाल में प्रवेश करती है ठीक वैसे ही भाजपा की विजय यात्रा भी बंगाल में प्रवेश करेगी. लेकिन हकीकत इतना आसान नहीं है. 

गंगा थोड़ा सा झारखंड में भी प्रवेश करती है
ये बात है कि बीजेपी चुनाव लड़ना बखूबी जानती है, उनके पास ताकत पैसा संगठन सबकुछ है जिसे वे एक सिस्टमेटिक वे में प्रयोग करती है, लेकिन फिर भी बंगाल की राजनीतिक जमीन इतनी मुलायम नहीं है. बता दें कि गंगा जैसे जैसे आगे बढ़ती है और भी गहरी होती चली जाती है. गंगा बिहार में प्रवेश करने से पहले थोड़ा सा झारखंड में भी प्रवेश करती है, जिस झारखंड में चुनाव जीतने के लिए बीजेपी ने अपना एडी चोटी एक कर दिया था. लेकिन बावजूद इसके जेएमएम की सरकार ने बीजेपी को शिकस्त दे दी थी. 

बंगाल में मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत
बिहार की डेमोग्रेफी बीजेपी के लिए दूसरी बड़ी मुसीबत है, बंगाल में मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत है जो लगभग 100 सीटों पर सीधा सीधा असर डालती है. CAA, NRC, वक्फ बिल, UCC जैसी बातों को बहुसंख्यक आबादी भले पसंद करे, पर मुसलमानों के लिए ये सब ‘एंटी-मुस्लिम’ संकेत हैं. ऊपर से SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन ने बॉर्डर इलाकों में डर और बढ़ा दिया है.

ममता की छवि 
ममता खुद को मां दुर्गा के तरह पेश करती है धार्मिक धुर्वीकरण के बावजूद बीजेपी को यहां बची खुची सीट ही मिलती है. बंगाल का भद्रलोक हिन्दू, पढ़ा लिखा वर्ग व वामपंथी झुकाव वाला वर्ग बीजेपी से नफरत करता है. कई लोग तो अब बंगाल में रहते भी नहीं. 

194 में 150 जीतना सपना से कम नहीं
सीटों को देखें तो बंगाल में सरकार बनाने के लिए 294 में से 150 सीटों पर जीत मिलनी चाहिए जो कि बड़ा मुश्किल लग रही है, क्योंकि 100 मुस्लिम बहुल सीट तो बीजेपी के हाथ आने से रहा. अब 194 में से 150 सीट जीतना एक सपने से कम नहीं होगा. 

पक्ष से ज्यादा विपक्ष की भुमिका में रहती है ममता
ममता ने 14 साल सत्ता में रहने के बाद भी अपने आप को जमी हुई नेता की तरह कभी पेश नहीं किया, बल्कि वो आज भी खुद को एक स्थाई विपक्ष की भुमिका में रहती है. ममता भले बंगाल की सीएम है लेकिन उनका व्यव्हार ऐसा रहता है जैसे कि हर दिन केंद्र से लड़ाई लड़ रही हो. ममता का गुस्सैल तेवर लोगों को विपक्ष जैसा फील करवाता है. वो लगातार लड़ती दिखती है. मनरेगा के रुके फंड हो या फिर पीएम आवास योजना क् पैसै इन सबका दोष हमेशा से एक बदले की भावना से मोदी शाह पर डालती है.

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