न्यूज 11 भारत
रांची/डेस्क: आखिरकार विश्व की दो सबसे प्राचीन संस्कृतियों के दो महारथी एक मंच पर आ गये. विश्व के बदलते समीकरणों या यूं कहें कि बदल चुके समीकरणों के बीच भारत और चीन का एक साथ आना हैरत भरा और सुखद अनुभव है. भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन के तियानजिन में काफी गर्मजोशी के साथ मिले हैं. विश्व की दो बड़ी अर्थव्यवस्था के प्रमुखों का यह मिलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तानाशाही पॉलिसी के प्रतीक टैरिफ का आतंक फैला हुआ है.
जैसी उम्मीद थी, पीएम मोदी और जिनपिंग की बैठक काफी सकारात्मक माहौल में हुई. दोनों वैश्विक नेताओं की यह मुलाकात करीब 40 मिनट चली. इस मुलाकात में भारत और चीन के बीच आपसी सम्बंधों को सम्मान देते दिखे और रिश्ते को भरोसे के सहारे आगे बढ़ाने पर जोर दिया. वहीं, चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया बदल रही है और भारत और चीन का दोस्त और अच्छा पड़ोसी बनना बहुत जरूरी है.
हम विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताएं - पीएम मोदी
इस बात से कोई इनकार नहीं है कि भारत और चीन विश्व की दो प्राचीन सभ्यताएं हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों देशों ने अपनी-अपनी सभ्यताओं को जीवंत रखा है. इसका प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सम्बोधन में जिक्र भी किया कि भारत और चीन दुनिया की सबसे प्राचीन दो सभ्यताएं हैं. जिनपिंग का जवाब भी उसी तरह गर्मजोशी दिखाने वाला था. उन्होंने भारत और चीन को दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बता हुए कहा कि आज हाथी और ड्रैगन एक साथ आ गये है. दोनों देशों का साथ आना बेहद जरूरी भी है. शी जिनपिंग ने पीएम मोदी से मुलाकात कर खुशी जाहिर करते हुए एससीओ बैठक में पीएम मोदी का दिल से स्वागत किया.
पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात के दौरान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, विदेश सचिव विक्रम मिसरी, चीन में भारत के राजदूत प्रदीप रावत भी उपस्थित थे. वहीं, चीन के पीएम ली कियांग, विदेश मंत्री वांग यी और भारत में चीन के राजदूत शू फेहोंग भी इस अवसर पर मौजूद थे. पीएम मोदी और जिनपिंग की इस मुलाकात में भारत पर लादे गये अमेरिकी टैरिफ की भी चर्चा हुई. चीन ने जहां इसके लिए अमेरिकी सरकार की निंदा की वहीं यह भी कहा कि उनके देश के बाजार भारतीय उत्पादों के लिए खुले हुए हैं.