फ़लक शमीम/न्यूज़11 भारत
हजारीबाग/डेस्क: हजारीबाग जिला पोस्टमार्टम हाउस में सीपेज़ की समस्या इन दिनों गंभीर होती जा रही है. सीलन और पानी रिसाव के कारण न सिर्फ कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है, बल्कि यहां रखे गए संरक्षित नमूनों (विसरा ) की गुणवत्ता पर भी खतरा मंडराने लगा है.पोस्टमार्टम हाउस के टेक्नीशियन ने जानकारी दी कि विसरा बेहद हिफाज़त से रखा जाता है, लेकिन लगातार हो रहे सीपेज़ के कारण उनके खराब होने की आशंका बनी रहती है. उन्होंने बताया कि कुछ नमूने लंबे समय तक संरक्षित रखने होते हैं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उन्हें जांच के लिए भेजा जा सके. लेकिन मौजूदा स्थिति में यह चुनौतीपूर्ण हो गया है.इस मामले पर जब संबंधित पदाधिकारी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि “हम प्रयास करते हैं कि अधिकतर मामलों में विसरा पुलिस को हैंड टू हैंड उपलब्ध करवा दिया जाए, ताकि उन्हें संरक्षित रखने की नौबत ही न आए.” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि संरक्षित विसरा अधिकतम तीन महीने तक ही सुरक्षित रह पाता है.सीपेज़ की समस्या पर अधिकारी ने बताया कि इसको लेकर पहले ही कागज़ी कार्यवाही पूरी हो चुकी है और जल्द ही डीएमएफटी के तहत पोस्टमार्टम हाउस की मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा.स्थानीय नागरिकों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि जिले में न्यायिक प्रक्रियाओं की दृष्टि से पोस्टमार्टम हाउस की भूमिका बेहद अहम है, ऐसे में वहां की मूलभूत संरचनाओं की मरम्मती जल्द से जल्द होनी चाहिए ताकि सबूतों की गुणवत्ता और न्यायिक प्रक्रिया पर असर न पड़े.