Tuesday, Jul 16 2024 | Time 04:31 Hrs(IST)
 logo img
NEWS11 स्पेशल


झारखंड के इस जिले में दफन है बेशकीमती खजाना और इतिहास की गाथा

झारखंड के इस जिले में दफन है बेशकीमती खजाना और इतिहास की गाथा

न्यूज11 भारत


रांची/डेस्क: झारखंड की धरती के गर्भ में समृद्ध रियासतों के कई गाथा और बेशकीमती खजाने दफन है. जो दिन-भर-दिन संरक्षण और खोज के अभाव में विलुप्त होते जा रही है. इन्ही में से एक सिमडेगा के बीरू रियासत के जमींदोज महल की रोचक गाथा है. शायद ही यह गाथा आपने सुनना होगा. जहां इंसान के जिंदा बाघ बन जाने से लेकर समृद्ध खजाने का इतिहास दफन है.


सरंक्षण और खोज के अभाव में दफन है इतिहास और खजाना


झारखंड के सिमडेगा जिले के बीरूगढ एक जगह है. जो इसके गर्भ में इतिहास के कई राज और बेशकीमती खजाने दफन है. संरक्षण और खोज के अभाव में धरोहर विलुप्त होता जा रहा है. सिमडेगा के बीरूगढ अपने गर्भ में अतीत के कई ऐसी रोचक गाथा और बेशकीमती खजाने को छुपाए हुए है. अगर इसकी खोज शुरू कि जाए तो कालांतर के कई रोचक गाथा सामने आकर अपनी रोचकता से लोगो को आश्चर्य में डाल सकती है. आपको बता दें, बीरूगढ में अभी गंगराजवंश के वंशज रहते हैं. इनके निवास के ठीक पीछे पहाड़ी की तलहटी पर एक पुराने जमींदोज यानी भूगर्भ में स्थित हो चुके है. हालांकि, महल के भग्नावशेष दिखते है. जो कई रहस्य समेटे हुए है. 


बीरुगढ के पूर्व राजा कोनकादेव रात में बन जाते थे बाघ


वर्तमान राजपरिवार के युवराज दुर्गविजय सिंह देव ने बताया कि वे लोग पुरी गजपति महाराज के वंशज हैं. जो वहां से चलकर यहां तक पहुंचे और उन्होंने रातू महाराज को वाकुंडा हीरा देकर बीरुगढ़ की रियासत प्राप्त की थी. इसके पहले बीरूगढ की रियासत कोनगादेव के अधीन थी. सन् 1326 में कोनगादेव से रातू महाराज ने यह रियासत गंग वंश को सौंपा था.


गंगराज वंश के पहले के राजा कोंनगादेव की कहानी बहुत विचित्र है. युवराज ने बताया कि कोंनगादेव बाघराजा थे. वे रात में बाघ बन जाया करते थे. एक बार अपनी रानी का गर्दन अपने पंजे से अलग कर दिया था. तबसे वे अकेले हो गए थे. ये जमींदोज महल यही कोंनगादेव का है. जो जमीन के अंदर से खोजा जाए तो कई राज सामने आ सकते हैं. 



बीरूगढ रियासत का इतिहास कहता है कि ये खंडहर कई सौ साल पहले सात तल्ले का महल हुआ करता था. जिसके अंदर से तीन गुफाएं भी थी. युवराज के अनुसार, यह महल उनके परिवार से पहले के राजा कोंनगादेव का था. जिन्हे बाघराजा भी कहा जाता था. युवराज ने बताया कि 1937 में एक भूकंप में ये महल जमींदोज हो गया. इसके अंदर कई बेशकीमती सामान भी दफन हो गए. आज बस उसके बाहरी हिस्से दिखते हैं. उन्होंने कहा कि वह कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर इस राज को खोलने की कोशिश की है. लेकिन आज तक किसी ने पहल भी नहीं की.



न्यूज11 भारत इस कोंनगादेव के इस विचित्र गाथा की पुष्टि नहीं करता हैं. लेकिन युवराज दुर्ग विजय सिंह देव के द्वारा बताई गई गाथा अगर सही है तो इस महल की खुदाई से पुरातत्व के कई राज से पर्दा उठ सकता है.


अधिक खबरें
भारत का वो अनोखा रहस्यमयी मंदिर, जो हर दिन लेता है जलसमाधि
जून 20, 2024 | 20 Jun 2024 | 7:17 AM

हमारे देश में रहस्‍यों से भरे मंदिरों की कमी नहीं है. विश्व का सबसे अनूठा भारत का एक ऐसा मन्दिर जो हर दिन जलसमाधि लेता है और जल से वापस निकल भी जाता है इसकी कहानी महाभारत काल से जुड़ी हुई है. यह भगवान निक्कलंगेश्वर का मंदिर भावनगर, गुजरात के पास, अरब सागर के अंदर 1KM में स्थित है.

भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय हैं ये पांच चीजें, घर में रखने से होती है समृद्धि और धन की प्राप्ति
जून 17, 2024 | 17 Jun 2024 | 10:05 PM

भगवान श्री कृष्ण को इस देश में काफी श्रद्धा से पूजा जाता है. उनकी पूजा करने का बेहद खास महत्व है. अपरंपार महिमा वाले श्री कृष्ण भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं. उनकी पूजा की विधि भी बिल्कुल सरल है. इसके लिए आपको रोजाना सुबह स्नान कर भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. इसके बाद आपको कान्हा जी को प्रिय माखन, मिश्री, शहद समेत आदि चीजों का भोग लगाना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार सच्चे मन से श्रीकृष्ण की उपासना करने से प्रभु की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही जातक को मृत्यु लोक में सभी प्रकार के सांसारिक सुख प्राप्त होते हैं. भगवान श्रीकृष्ण के लिए कुछ चीजें बहुत प्रिय हैं, जिनको घर में रखने से सुख-समृद्धि और धन में वृद्धि होती है.

पूरी के जगन्नाथपुर मंदिर के तर्ज पर रांची में भी निकाला जाता है रथ यात्रा, जानिए क्या है इसका महत्व
जून 17, 2024 | 17 Jun 2024 | 2:53 AM

पूरी के जगन्नाथपुर मंदिर के तर्ज पर रांची के धुर्वा स्थित जगन्नाथपुर मंदिर में भी रथ यात्रा का आयोजन होगा. इसको लेकर तैयारी की जारी है. बता दें कि रथ यात्रा के दौरान 7 जुलाई को भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ मौसीबाड़ी जाएंगे. इस रथ का निर्माण महावीर लोहरा अपने परिवार के साथ करते हैं. महावीर लोहरा के पूर्वज पीढ़ी दर पीढ़ी यह काम करते आ रहे हैं. रथ यात्रा के लिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथों का निर्माण होता है. यात्रा में सबसे आगे भगवान बलभद्र, बीच में बहन सुभद्रा और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का रथ निकलता है.

कौन हैं देश विदेश तक में प्रख्यात नीम करोली बाबा, जाने उनका जीवन परिचय
जून 15, 2024 | 15 Jun 2024 | 4:41 AM

चारों ओर पहाड़ों से घिरी वादियों के मनमोहक दृश्य को देखकर सभी लोग रोमांच से भर जाते हैं. इस रोमांच की ऊर्जा का कारण उत्तराखंड के नैनीताल स्थित कैंची धाम मंदिर है. इस मंदिर का अपना खासा महत्व है और यहां के नीम करौली बाबा को मानने वालों की संख्या अनगिनत है. यह देश ही नहीं विदेशों भी काफी लोकप्रिय हैं. वह अपने एक साधारण जीवन, पर उनके द्वारा किए गए चमत्कारों को आज भी भी याद किया जाता है. 15 जून को कैंची धाम के 60वां स्थापना दिवस मनाया जाता है. इस दिन बेहद उत्साह के साथ भंडारे का आयोजन किया जाता है. आइए जानते हैं नीम करोली बाबा के बारे में विस्तार से.

खालिस्तान, वर्तमान, इतिहास और भविष्य
जून 14, 2024 | 14 Jun 2024 | 5:51 PM

31 अक्टूबर 1984, स्थान नई दिल्ली का प्रधानमंत्री आवास. अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजी और तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों ने उनके ही आवासीय परिसर में हत्या कर दी. घटना अप्रत्याशित थी. किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि एक प्रधानमंत्री की उनके ही अंगरक्षक हत्या करेंगे. ये सभी अंगरक्षक इंदिरा जी को बड़े प्रिय थे. इस घटना ने पूरे देश ही नहीं, पूरे विश्व को उद्वेलित कर दिया. आखिर इंदिरा गांधी की हत्या क्यों हुई? वे अंगरक्षक जो इंदिरा गांधी के सबसे वफादार थे अचानक विद्रोही क्यों हो गये?