न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना : बिहार में वर्ष 2016 से शराबबंदी कानून लागू है, जिसे राज्य सरकार ने सामाजिक सुधार और नशामुक्ति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया था। हालांकि, समय-समय पर इस कानून को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं, खासकर जहरीली शराब से होने वाली मौतों के मामलों के बाद। बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी कानून एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है।
शराब बंदी कानून की विफलता पर तेजस्वी ने साधा सवाला ।
हाइलाइट्स:
- जहरीली शराब से लगातार हो रही मौतों ने नीति की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
- नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार पर तीखा हमला बोला है।
- तेजस्वी यादव ने शराबबंदी की विफलता के लिए शासन-प्रशासन और माफिया गठजोड़ को जिम्मेदार बताया है।
- इस मुद्दे पर बिहार की राजनीति में एक बार फिर जोरदार बहस शुरू हो गई है।
जहरीली शराब से लगातार मौतें बनी चिंता का कारण
राज्य में कई जिलों से लगातार जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं ने शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब का कारोबार अब भी जारी रहने के आरोप लगते रहे हैं।
तेजस्वी यादव का सोशल मीडिया पोस्ट
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए शराबबंदी कानून पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि राज्य में शराबबंदी लागू होने के बावजूद जहरीली शराब से लगातार मौतें हो रही हैं, जो इस नीति की विफलता को दर्शाता है।
विफलता के लिए कौन जिम्मेदार? तेजस्वी का सवाल
अपने पोस्ट में तेजस्वी यादव ने सीधा सवाल किया कि शराबबंदी की विफलता का जिम्मेदार कौन है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन और शराब माफिया के कथित गठजोड़ के कारण यह कानून अपने उद्देश्य को पूरा करने में असफल रहा है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य में अवैध शराब का नेटवर्क मजबूत बना हुआ है और इसके पीछे प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही और मिलीभगत भी जिम्मेदार है। उन्होंने इसे कानून की सबसे बड़ी विफलता बताया।
राजनीतिक बहस फिर हुई तेज
इस मुद्दे के उठने के बाद बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। विपक्ष सरकार से शराबबंदी नीति की समीक्षा की मांग कर रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताता है। गौरतलब है कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद कई बार जहरीली शराब से बड़े हादसे हो चुके हैं। हर बार विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है और अब यह बहस फिर तेज हो गई है।
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