न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर काफी गहमागहमी मची हुई है. देश की कई बड़ी हस्तियों लालकृष्ण आडवाणी (BJP के वरिष्ठ नेता) प्रतिभा आडवाणी (लालकृष्ण आडवाणी की पुत्री), एस. जयशंकर (विदेश मंत्री) क्योको जयशंकर (एस जयशंकर की पत्नी), जगदीप धनखड़ (पूर्व उपराष्ट्रपति) सुदेश धनखड़ (जगदीप धनखड़ की पत्नी), रेखा गुप्ता (दिल्ली की मुख्यमंत्री), अरविंद केजरीवाल (दिल्ली के पूर्व CM) मनीष सिसोदिया (दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री), कपिल सिब्बल (कांग्रेस सांसद), अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस नेता), बांसुरी स्वराज (सांसद), एसएस संधू (चुनाव आयुक्त), विक्रम मिस्री (विदेश सचिव), सीवी राव (भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक) ऐसे कई और भी नाम हैं जिन्हें अलग-अलग कारणों से चुनाव आयोग का एसआईआर नोटिस मिला हुआ है. अब इन दिग्गज हस्तियों में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी का नाम भी शामिल हो गया है.
सोनिया गांधी का मामला थोड़ा अलग है. सोनिया गांधी की मुश्किलें दूसरे कारण से बढ़ सकती है. दरअसल, 1980 में नागरिकता मिलने से पहले ही मतदाता सूची में नाम को जोड़ने का यह मामला है. राउज एवेन्यू कोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज करने से मना करने वाले मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है.
बता दें कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया गया था. अब दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट को उस आदेश को रद्द कर दिया है. आदेश रद्द करने के साथ राउज एवेन्यू की अदालत ने अब पूरे मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है.
सोनिया गांधी से जुड़ा क्या है मामला?
यह पूरा मामला 1980 का है. जो कि मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम दर्ज किए जाने से जुड़ा हुआ है. सोनिया गांधी को लेकर यह आरोप पहले भी लगते रहे हैं कि उन्होंने भारतीय नागरिकता हासिल भी नहीं की थी और कथित तौर पर दस्तावेजों के आधार पर उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज करा लिया गया था. अब एक शिकायतकर्ता ने यही आरोप लगाकर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग रखी है. याचिका पर सुनवाई करते हुए राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने माना कि निचली अदालत के आदेश में शिकायत पर फैसला लेने के पीछे पर्याप्त और स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किए गए थे. कोर्ट ने यह कहते हुए कि "मतदाता सूची की पवित्रता संसदीय लोकतंत्र में अटूट विश्वास का विषय है, सबसे ताकतवर व्यक्ति भी एक मतदाता के तौर पर आम व्यक्ति के बराबर है" केस को फिर से जिंदा कर दिया है.
यह भी पढ़ें: पुरुलिया के बलरामपुर में किसान धान की बालियां समय से पहले निकलने से किसान परेशान