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रांची/डेस्क: बिहार की राजनीति में शुक्रवार रात एक बड़ा ड्रामा देखने को मिला. पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी 31 साल पुराने एक विवादित मामले में हुई हैं. आरोप है कि वर्ष 1995 में पप्पू यादव ने पटना के एक किराए के घर पर कब्जा कर लिया था. मामले की शुरुआत तब हुई थी जब पप्पू यादव ने इस घर को किराए पर लिया और पहले इसे अपना दफ्तर बना लिया. इसके बाद उन्होंने मकान पर पूरी तरह कब्जा कर लिया. मकान मालिक विनोद बिहारी लाल ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी.
फिलहाल पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को पटना के IGIMS अस्पताल से PMCH शिफ्ट किया गया हैं. बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के दौरान उन्हें चोट लगी थी, जिसके बाद सिर में तेज दर्द और धड़कन बढ़ने की शिकायत सामने आई. तबीयत में अचानक आई परेशानी के चलते डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें बड़े चिकित्सा संस्थान PMCH रेफर किया गया. पप्पू यादव को स्ट्रेचर पर एम्बुलेंस के जरिए PMCH लाया गया. इस दौरान पटना पुलिस की टीम भी उनके साथ मौजूद रही, ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे. अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया है.
अदालत ने पप्पू यादव को कई बार समन जारी किया, लेकिन वे पेश नहीं हुए. इसके बाद अदालत ने दो दिन पहले उनकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश और गिरफ्तारी वारंट जारी किया. कोर्ट के निर्देश पर पटना पुलिस ने शुक्रवार आधी रात पप्पू यादव को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के दौरान उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई. पप्पू यादव को आज शनिवार सुबह कोर्ट में पेश किया जाएगा.
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव का बयान
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव ने कहा, "मेरे साथ क्या होगा, पता नहीं." उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें NEET छात्रा के लिए लड़ाई लड़ने के कारण धमकाया जा रहा हैं. उन्होंने कहा, "फांसी पर चढ़ने के लिए तैयार हूं, लेकिन झुकने वाला नहीं." पप्पू यादव ने आगे आरोप लगाया कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी उनके खिलाफ साजिश रच रहे है और उनकी हत्या करवाने की कोशिश की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें सादी वर्दी और सिविल वर्दी में पुलिसकर्मी धमकाने आए. पप्पू यादव ने कहा, "लोकसभा की कार्यवाही खत्म होते ही हम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए पटना आए, लेकिन हमें लगा कि कोई हमें मारने आया हैं. सच के रास्ते से हम कभी नहीं हटेंगे."
31 साल पुराना मामला
यह विवाद करीब 31 साल पुराना है और गर्दनीबाग थाना (FIR संख्या 552/1995) से जुड़ा हैं. शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया कि पप्पू यादव ने धोखाधड़ी से मकान किराए पर लेकर उसे कार्यालय में बदल दिया और इस दौरान मकान मालिक को जानकारी नहीं दी.
कोर्ट की लगातार गैर-हाजिरी के कारण पहले गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया. इसके बाद आरोपियों के ठिकानों पर इश्तेहार चस्पा करने और संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए गए. अब कोर्ट ने पप्पू यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए उनकी संपत्ति कुर्क करने का अंतिम आदेश दिया हैं. यह कार्रवाई 1995 से लंबित मामले में एक अहम कानूनी मोड़ मानी जा रही हैं.
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