महागठबंधन का कोई 'बहाना' भी नहीं काम आया, तेजस्वी तो अपने 'घर' में ही हो गये फेल!

बिहार विधानसभा चुनाव 2025

महागठबंधन का कोई 'बहाना' भी नहीं काम आया, तेजस्वी तो अपने 'घर' में ही हो गये फेल!

बदल चुका है बिहार, अब झूठे वादों-दावों से लुभा पाना मुश्किल है

महागठबंधन का कोई बहाना भी नहीं काम आया तेजस्वी तो अपने घर में ही हो गये फेल

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: राजनीति में अवाम का ही जलवा चलता है और बिहार विधानसभा चुनाव ने यह साबित भी कर दिया. बिहार के अवाम ने एनडीए को सिर-आंखों पर तो बिठाया, यह तो ठीक है, लेकिन महागठबंधन, खासकर लालू-तेजस्वी के आरजेडी को इस तरह से जमीन पर पटक दिया, इसकी कल्पना उन्होंने नहीं की होगी. बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे अभी पूरी तरह से सामने नहीं आये हैं, लेकिन नतीजे जो भी सामने दिख रहे हैं, वह इस चुनाव की कहानी कह रहे हैं, और कह रहे हैं- एक बार फिर एनडीए सरकार.

इस बार के चुनाव में एनडीए के सभी दलों को जनता का खूब आशीर्वाद मिला है. यह तो ठीक है, लेकिन रूझानों में ही सही, महागठबंधन को ऐसी-ऐसी सीटों पर हार का सामने करना पड़ रहा है जिसकी उसने कल्पना नहीं की होगी। 30 सीटों के नतीजे तो ऐसे आ रहे हैं, जो पूरी तरह से चौंका रहे हैं. ये सीटें मुस्लिम-यादव बहुल सीटें रही हैं, और इन्हें महागठबंधन का गठ माना जाता रहा है.  मगर इस बार पासा पलट गया है. महागठबंधन को तो इन पर हार की उम्मीद नहीं थी, खुद भाजपा और एनडीए भी अचरज में है, उन्हें इन सीटों पर जीत मिल रही है या मिलने जा रही है.

दावे और बहाने पूरी तरह से हो गये फेल

एनडीए को इस बार सत्ता से बाहर करने के लिए महागठबंधन ने जनता के सामने वादों की बौछार कर दी थी. इन वादों में तो कई वादे ऐसे थे, जिनको पूरा होने का जनता को ही भरोसा नहीं रहा होगा, खुद गठबंधन भी इन वादों को पूरा कर पाने में खुद को समर्थ पाता. जिसे शायद जनता ने कोरा वादा समझ कर पूरी तरह से नकार दिया. महागठबंधन के वादों में सबसे बड़ा वादा तो हर घर में नौकरी था. लेकिन लालू-तेजस्वी के नौकरी के इस दावे को भी बिहार की जनता ने सही नहीं माना और ठुकरा दिया.

यही नहीं राहुल गांधी ने वोट चोरी को लेकर भौकाल मचाने की कोशिश तो खूब की, लेकिन बिहार की जनता ने उनकी दलीलों को अनसुना कर दिया. उन्हें राहुल गांधी की दलीलों पर भरोसा नहीं हुआ. भरोसा हुआ तो नीतीश के सुशासन और कानून व्यवस्था पर. इस बार के चुनाव की सबसे बड़ी बात यह रही कि मामूली झड़पों को छोड़ दिया जाये तो मतदान के दौरान किसी की हत्या नहीं हुई. सच कहा जाये तो अब पहले वाला बिहार नहीं रहा, बिहार के लोग गरीब जरूर हैं, लेकिन बेवकूफ नहीं. वहां के लोग काफी बुद्धिमान हैं और उन्हें झूठे वादों और दलीलों के भरमाया नहीं जा  सकता. 

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