न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - Bihar Liquor Ban:बिहार में नए मुख्यमंत्री आते ही सबसे पहली चर्चा शराब बंदी कानून को हटाने को लेकर होने लगी। कई विधायकों का मानना है कि इस कानून की समीक्षा की जानी चाहिए या इसे खत्म करने पर विचार होना चाहिए। जदयू विधायक अनंत सिंह ने साफ कहा कि राज्य में शराबबंदी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हुई है। उनके मुताबिक शहरों से लेकर गांवों तक लोग आज भी शराब का सेवन कर रहे हैं, बस अब यह सब छिपकर हो रहा है।
हाईलाइट्स:
- बिहार में शराबबंदी कानून पर सियासी घमासान तेज
- सत्ता पक्ष के विधायक ही उठा रहे सवाल
- अनंत सिंह ने कहा—पूरी तरह फेल है शराबबंदी
- जहरीली शराब से लोगों की जान पर खतरा
- राजस्व नुकसान और अवैध कारोबार बढ़ने की चिंता
शुरुआती असर के बाद बिगड़े हालात
अनंत सिंह ने बताया कि जब यह कानून लागू किया गया था, तब उन्होंने इसका समर्थन किया था और शुरुआती दौर में इसका असर भी दिखा। लेकिन समय के साथ हालात बदल गए। उन्होंने चिंता जताई कि अब लोग सुरक्षित शराब नहीं मिलने के कारण अवैध और जहरीली शराब पीने को मजबूर हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
शराब बिक्री बहाल करने की मांग
अनंत सिंह का कहना है कि सरकार को शराब बिक्री फिर से शुरू करने पर विचार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि जो लोग शराब पीकर सार्वजनिक जगहों पर हंगामा करते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका तर्क है कि इससे सरकार को राजस्व का नुकसान भी नहीं होगा और व्यवस्था भी बनी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करेंगे।
अन्य विधायकों ने भी उठाई आवाज
इस मुद्दे पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद भी अपनी राय रख चुके हैं। उनका कहना है कि सिर्फ प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि लोगों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करना ज्यादा जरुरी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून के कारण राज्य को आर्थिक नुकसान हो रहा है, जबकि अवैध कारोबार करने वालों को फायदा मिल रहा है।
राजस्व और विकास पर असर
माधव आनंद ने बताया कि लगभग एक दशक से यह कानून लागू है और अब इसकी समीक्षा का समय आ गया है। उनके अनुसार बिहार को विकास के लिए संसाधनों की जरूरत है, लेकिन शराबबंदी के चलते राजस्व में कमी आ रही है।
मांझी पहले ही जता चुके हैं चिंता केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी भी कई मौकों पर इस कानून पर सवाल उठा चुके हैं। उनका मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब तबके पर पड़ा है। जहां संपन्न लोग महंगी शराब हासिल कर लेते हैं, वहीं गरीब लोग सस्ती और मिलावटी शराब के कारण अपनी जान जोखिम में डालते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शराबबंदी के चलते बड़ी संख्या में गरीब लोग जेलों में बंद हैं, जो एक गंभीर सामाजिक मुद्दा बन चुका है। ऐसे में सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह इस कानून को लेकर संतुलित और व्यावहारिक फैसला लें।
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