न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - पटना में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार की ओर से उन्हें आवंटित आवास खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह आवास अब नए आवंटन के तहत नंद किशोर राम को सौंप दिया गया है। इस फैसले के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है और इसे लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।
हाईलाइट्स -
- राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर जारी हुआ खाली करने का नोटिस
- आवास अब नए आवंटन के तहत नंद किशोर यादव को दिया गया
- नोटिस के बाद बिहार की सियासत में बढ़ी गर्मी
- राबड़ी देवी का तीखा बयान— “फोर्स बुलाकर खाली करवा दीजिए”
- सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज
प्रशासनिक फैसले पर सवाल और सफाई
सरकारी पक्ष का कहना है कि यह पूरा निर्णय नियमों और निर्धारित आवंटन प्रक्रिया के तहत लिया गया है और इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं है। वहीं विपक्षी खेमे में इसे लेकर असंतोष देखा जा रहा है और इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जा रहा है। इस पूरे मामले ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक तरफ प्रशासनिक पारदर्शिता की बात हो रही है तो दूसरी ओर इसे राजनीतिक हस्तक्षेप के रूप में भी देखा जा रहा है।
राबड़ी देवी का तीखा बयान और बढ़ता विवाद
इसी बीच गाजियाबाद से पटना पहुंचीं राबड़ी देवी से जब आवास खाली करने के नोटिस पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने बेहद तीखे अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “फोर्स बुलाकर खाली करवा दीजिए।” उनके इस बयान के बाद सियासी माहौल और गर्म हो गया है। समर्थकों का कहना है कि यह सरकार के फैसले के खिलाफ नाराजगी का संकेत है, जबकि विरोधी इसे नियमों के पालन पर सवाल उठाने वाला बयान बता रहे हैं। फिलहाल यह मामला केवल आवास आवंटन का नहीं रह गया है, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
इसे भी पढ़ें - एक अखबार से शुरु हुई क्रांति, 200 साल बाद भी गूंज रही आवाज़-क्या था हिंदी पत्रकारिता का असली सच और बिहार की छिपी भूमिका?