मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: एनके एरिया के केडीएच स्थित सायलो प्रोजेक्ट निर्माण कार्य में लगी भीमा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड–मधुकॉन कंपनी में अपनी मांगों को लेकर मजदूरों का आंदोलन तेज हो गया है. मजदूरों की नौ सूत्री मांगों को लेकर बुधवार को प्रबंधन और मजदूरों के बीच हुई बैठक में 6 मांगों पर सहमति बन गई, जबकि तीन प्रमुख मांगों पर निर्णय के लिए प्रबंधन ने अतिरिक्त समय मांगा है.
बैठक के बाद प्रोजेक्ट के प्रबंधक इदरीश अंसारी ने जानकारी देते हुए बताया कि मजदूरों द्वारा उठाई गई नौ मुख्य मांगों में से छह मांगों पर सहमति बन गई है. शेष मांगों को लेकर कंपनी के पुणे स्थित उच्च प्रबंधन से वार्ता कर आगे निर्णय लिया जाएगा.
मजदूरों के अनुसार अभी भी 8 घंटे की ड्यूटी, सरकारी दर से वेतन वृद्धि और महीने में 26 दिन की ड्यूटी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है. इन मांगों के समाधान के लिए प्रबंधन की ओर से 10 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा गया है और 18 अप्रैल तक समाधान का भरोसा दिया गया है.
मजदूरों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से लगभग 400 रुपये प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी पर काम कराया जा रहा है, जो श्रम के अनुपात में काफी कम है. इसके साथ ही 8 घंटे से अधिक काम कराने के बावजूद अतिरिक्त भुगतान नहीं दिया जाता, जिससे मजदूरों को अपने परिवार के भरण-पोषण में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
मजदूरों का कहना है कि ठेकेदारी व्यवस्था के कारण वे प्रबंधन और कॉन्ट्रैक्टर के बीच पिस रहे हैं. उनका आरोप है कि कंपनी से मोटी रकम पर काम लेने वाले कॉन्ट्रैक्टर मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी देकर उनका शोषण कर रहे हैं.
मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि 18 अप्रैल तक शेष तीन मुख्य मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो मजदूरों के साथ-साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा परिवार भी शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए बाध्य होगा. ऐसी स्थिति में आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी मधुकॉन सायलो प्रोजेक्ट प्रबंधन की होगी.
फिलहाल सायलो प्रोजेक्ट क्षेत्र में मजदूरों और प्रबंधन के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है. मजदूरों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं होगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा
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