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कुड़ू/डेस्क: कुड़ू प्रखंड क्षेत्र में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है. शनिवार की रात रुद गांव निवासी मुन्ना सिंह के रुद देवी मंडप के समीप खेत में बने घर का लोहे का दरवाजा तोड़कर जंगली हाथियों ने घर में रखा चार बोरा गेहूं चट कर दिया. इसके साथ ही खेत में लगी केले की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचाया. वहीं हाथियों के अचानक हमले से शेड में बंधी गायों ने अपना बंधन तोड़ भागकर किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल हुईं.
इसी क्रम में रुद गांव के ही सतीश भारती के बागान में घुसकर हाथियों ने केले की फसलों को रौंद डाला. ग्रामीणों के अनुसार हाथियों की संख्या चार बताई जा रही है, जो रात के अंधेरे में गांवों में घुसकर लगातार उत्पात मचा रहे हैं. एक दिन पूर्व शुक्रवार की रात हड़गड़ा निवासी धीरज तिर्की के पूरे घर को जंगली हाथियों ने बुरी तरह ध्वस्त कर दिया. हाथियों ने घर में रखा सारा अनाज चट कर दिया तथा घरेलू सामान को भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया. पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है.
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक दशक से जंगली हाथियों का आतंक कुड़ू क्षेत्र की जनता के लिए स्थायी आपदा बन चुका है. यह मामला ताजा उदाहरण है, लेकिन यह किसी एक या दो परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे कुड़ू क्षेत्र की रोज़मर्रा की सच्चाई बन चुकी है. अब तक हाथियों के उत्पात में सैकड़ों लोगों के घर उजड़ चुके हैं, हजारों एकड़ फसलें रौंदी जा चुकी हैं, दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं.
ग्रामीणों में वन विभाग और प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश है. लोगों का आरोप है कि विभागीय दावे केवल कागजों तक सीमित हैं. न तो पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिल रहा है और न ही हाथियों से बचाव के लिए कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था की जा रही है. लगातार हो रही घटनाओं से क्षेत्र के ग्रामीण दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं और प्रशासन से अविलंब ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
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