प्रेम कुमार सिंह/न्यूज़11 भारत
गुमला/डेस्क: भरनो प्रखंड क्षेत्र में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार जारी है. बीती रात जंगली हाथियों ने अमलिया पंचायत के अमलिया और डहुटोली गांव में जमकर उत्पात मचाया. हाथियों ने खेतों में लगी धान, मकई और शकरकंद की फसल को रौंदकर बर्बाद कर दिया. हाथियों के गांव के आसपास पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. किसान अपनी फसलों और घर-परिवार की सुरक्षा को लेकर रातभर जागकर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों के अनुसार रात के समय जंगल की ओर से जंगली हाथी गांव की ओर पहुंचा और खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया.
अमलिया गांव में किसान पंकज सिंह और मनोहर उरांव के खेत में लगी धान की फसल को हाथी ने रौंदकर काफी नुकसान पहुंचाया. वहीं इसके बाद डहुटोली गांव में मनबोध उरांव के खेत में लगी मकई और शकरकंद की फसल को हाथी ने पूरी तरह नष्ट कर दिया. हाथी ने जमीन के अंदर लगे शकरकंद को सूंड से उखाड़कर खाया और काफी मात्रा में फसल को बर्बाद कर दिया. इसी गांव के किसान चंद्रदेव उरांव के धान की फसल को भी हाथी ने नुकसान पहुंचाया है. ग्रामीणों ने बताया कि इस वर्ष अच्छी बारिश होने के कारण खेतों में फसल की स्थिति काफी बेहतर थी. किसानों को इस बार अच्छी उपज की उम्मीद थी, लेकिन हाथियों के लगातार खेतों में पहुंचने से उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है. तैयार हो रही फसल के बर्बाद होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के गांव की ओर आने से लोगों में भय बना हुआ है. विशेषकर रात के समय ग्रामीणों को अपने घरों से बाहर निकलने में डर लग रहा है. किसान अपने खेतों की रखवाली के लिए रातभर जाग रहे हैं. ग्रामीणों को आशंका है कि यदि हाथी दोबारा गांव की ओर पहुंचा तो जान-माल का भी नुकसान हो सकता है. ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गांव के आसपास वन विभाग की टीम को तैनात किया जाए और हाथियों को सुरक्षित तरीके से आबादी क्षेत्र से दूर भगाने की व्यवस्था की जाए. इसके साथ ही ग्रामीणों को रात के समय हाथियों की गतिविधियों से सतर्क करने के लिए टॉर्च, पटाखे एवं अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की गई है. वहीं ग्रामीणों ने वन विभाग से प्रभावित खेतों का तत्काल सर्वे कराकर किसानों को नियमानुसार फसल क्षति का मुआवजा उपलब्ध कराने की भी मांग की है. किसानों का कहना है कि समय पर फसल क्षति का आकलन और मुआवजा मिलने से उन्हें आर्थिक राहत मिल सकेगी. साथ ही हाथियों के गांव में प्रवेश को रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी उपाय किए जाने की जरूरत है.