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पलामू/डेस्क: पलामू जिले में अवैध खनन को लेकर ग्रामीणों और एक निजी कंपनी के बीच विवाद गहराता जा रहा है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि फेयर माइंस कार्बन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अवैध खनन, पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का विरोध करने पर उल्टा उनके खिलाफ ही थाना में प्राथमिकी दर्ज कर दी गई. इससे इलाके में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
ग्रामीणों की तीन शिकायतें, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने पड़वा थाना और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में 4 सितंबर, 16 सितंबर, 4 नवंबर और 6 नवंबर को कुल तीन शिकायतें दी थीं. इन आवेदनों में अवैध खनन, सरकारी जमीन पर कब्जा, पेड़ों की अवैध कटाई और पर्यावरण स्वीकृति से जुड़े नियमों के उल्लंघन जैसे आरोप दर्ज थे. इसके बावजूद पुलिस ने अब तक कंपनी के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की.
कंपनी की शिकायत पर उसी दिन दर्ज हुई FIR
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने उनकी शिकायतों पर जहां चुप्पी साध ली, वहीं 19 नवंबर को कंपनी द्वारा पड़वा थाना में दिए गए आवेदन पर उसी दिन तत्काल FIR दर्ज कर ली गई. ग्रामीणों का आरोप है कि इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस कंपनी के पक्ष में काम कर रही है.
सीओ की नोटिस के बाद तेज़ हुई हलचल
मामले को और तूल तब मिला जब 6 नवंबर को पड़वा अंचल अधिकारी ने कंपनी को सरकारी भूमि पर अवैध खनन और कोयला भंडारण को लेकर नोटिस जारी किया. इसके साथ ही पर्यावरण स्वीकृति की शर्तों के उल्लंघन की बात भी सामने आई. ग्रामीणों का आरोप है कि नोटिस जारी होने के बाद कंपनी ने उन पर दबाव बनाने के लिए शिकायतकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज कराई.
हम सिर्फ अपने जंगल-जमीन की रक्षा कर रहे हैं: ग्रामीण
ग्रामीण कहते हैं कि वे सिर्फ अपनी जमीन, जंगल और पर्यावरण को बचाने की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि कंपनी उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है ताकि अवैध खनन निर्बाध रूप से जारी रह सके. उन्होंने बताया कि अब वे इस मामले को उच्च अधिकारियों और राज्य सरकार तक ले जाएंगे. यदि न्याय नहीं मिला तो आंदोलन करने की भी चेतावनी दी है.
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