रोहन निषाद/न्यूज़11 भारत
चाईबासा/डेस्क: पश्चिम सिंहभूम जिले के बंदगांव प्रखंड में सड़क की जर्जर स्थिति से नाराज ग्रामीणों का धैर्य बुधवार को जवाब दे गया. नकटी-पोंगडा मुख्य मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने सुबह-सुबह सड़क पर उतरकर चक्का जाम कर दिया. समाजसेवी सुनील लागुरी और जुगल किशोर पान के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
4 घंटे तक ठप रहा आवागमन, आश्वासन के बाद खुला जाम
यह प्रदर्शन बुधवार सुबह करीब 6 बजे शुरू हुआ. ग्रामीणों ने सड़क के बीचों-बीच बैरिकेड लगाकर वाहनों का आना-जाना पूरी तरह रोक दिया. करीब 4 घंटे तक चले इस चक्के जाम की वजह से सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं. जाम की सूचना मिलते ही स्थानीय ईंट-भट्ठा संचालक मौके पर पहुंचे. उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वे अपनी ओर से सड़क के बड़े और खतरनाक गड्ढों को तुरंत भरवाने का काम शुरू करेंगे. इस भरोसे के बाद सुबह करीब 10 बजे ग्रामीणों ने जाम हटाया और यातायात दोबारा बहाल हो सका.
9 गांवों की 'लाइफलाइन'
यह सड़क ग्रामीणों के अनुसार नकटी-पोंगडा सड़क केवल एक रास्ता नहीं बल्कि पूरे इलाके की जीवनरेखा है.
छात्रों की परेशानी
इस बदहाल मार्ग से रोजाना नौ गांवों के सैकड़ों छात्र-छात्राएं स्कूल और कॉलेज जाने के लिए मजबूर हैं.
श्रद्धालुओं को दिक्कत, फिर भी विभाग नहीं करती है कोई सुनवाई
समाज सेवी सुनील लागुरी ने कहा कि यह रास्ता धार्मिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है. प्रसिद्ध माता कंसरा मंदिर, पोंगडा पाउड़ी मंदिर और देवी स्थल दुर्गादा जाने वाले हजारों श्रद्धालुओं को इस टूटी सड़क के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.यह सड़क सालों से उपेक्षा का शिकार है. अगर ग्रामीण कार्य विभाग ने अगले 15 दिनों के भीतर सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं कराया, तो ग्रामीण एकजुट होकर विभाग के कार्यालय का घेराव करेंगे और एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे.
प्रदर्शन में ये रहे शामिल
इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से सुनील लागुरी, जुगल किशोर पान, दशरथ तांती, बसंत तांती, कार्मेल बोदरा, रवि तांती, दिनेश नायक, शिबू संडील, नंदलाल गागराई, कृष्णा संडील, राजा तांती, इंद्रजीत तांती और सामु पूर्ति समेत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण महिला-पुरुष शामिल हुए. ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर काम शुरू नहीं हुआ, तो इसके बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की पूरी जिम्मेदारी आरईओ विभाग की होगी.