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सिमडेगा/डेस्क: जंगलो पहाडों से आच्छादित सिमडेगा के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों जहरीले सांपों का आतंक छाया है. इनके जहर के कहर से कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं. सर्पदंश के के बाद ओझा गुणी के चक्कर में फंस कर लोगों की जा रही है अधीक जानें. जिले में बढता जहर का कहर चिंता का विषय बनता जा रही है.
जंगलों पहाडों के बीच बसे सिमडेगा के ग्रामीण ईलाकों में इन दिनों जहरीले सांपो का आतंक छाया है. भीषण गर्मी के बाद बारिश की फुहार पडते हीं जमीन के अंदर घुसे हुए सांप बाहर निकल जाते आए हैं और बाहर की गर्मी से बचने के लिए ये सांप लोगों के घरों में भी घुस जाते हैं. ग्रामीण ईलाकों में इन दिनों अक्सर बडे बडे जहरीले सांप निकल कर लोगों के घरों तक पंहुच रहे हैं. जहां इन विषधरों से अंजान लोग बेवजह इनकी जहर का शिकार हो जाते हैं. दरअसल सिमडेगा के ग्रामीण ईलाको में लोगों की लिविंग स्टाइल थोडी अलग है.
अधिकांश घर कच्चे और खपडों के होते हैं. जहां असानी से सांप घुस जाते हैं. बरसात के शुरूआती दिनों में उमस भरी गर्मी भी होती है. जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर लोग जमीन पर सोते हैं. सांप इनके बिस्तर पर चढ कर इन्हे अपना शिकार बना लेते हैं. सिमडेगा सदर अस्पताल की रिकार्ड के अनुसार पिछले 01 महीने में सिर्फ सदर अस्पताल में सर्पदंश के 61 केस आए हैं जिनमें से 06 लोगों की मृत्यु हुई है. ये आकंडे सिर्फ सदर अस्पताल के हैं पुरे जिला का आकंडा इससे अधिक है. इन आंकडों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां जहर का कहर कितना हावी है. ये तो वो मामले हैं जो अस्पताल पंहुचते हैं.
सिमडेगा में सर्पदंश के बाद मौत के बढते मामलों के पीछे अंधविश्वास भी एक सबसे बडा कारण है. यहां तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति यह है कि जब लोगों को सांप डंसता है तो लोग पहले झाड फुंक करवाते हैं. झाडफुंक वाले भी ग्रामीण को कई भार दावा करते हैं कि झाडफुंक से हीं जान बचेगा. लेकिन जब मामला बिगडता दिखता है तब हीं लोग मरीज को अस्पताल आते हैं. इस चक्कर में कभी कभी देर हो जाने के कारण सर्पदंश के मरीज की मौत भी हो जाती है और कई मामले तो डर के कारण भी सरकारी रिकार्ड में नहीं आते हैं.
सिमडेगा के ग्रामीण क्षेत्रों में ओझागुणी अपने सब्जबाग से लोगों के दिलो दिमाग पर इस तरह कब्जा जमा लेते हैं कि लोग झाडफुंक के बाद मृत हो जाने पर मरीज का पोस्टमार्टम तक नहीं कराना चाहते हैं. सूत्रों की माने तो ओझा गुणी इनके दिमाग में ये बात बैठा दिए हैं कि सांप ईश्वर के प्रकोप के कारण डंसता है. मौत होने पर शरीर में चीरा लगेगा तो मृतक की आत्मा को शांति नहीं मिलेगा. यही कारण है कि लोग पोस्टमार्टम से भी दुर भागते हैं. पिछले कई केस ऐसे हीं सामने आए हैं जहां सर्पदंश से मृत लोगों का पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस प्रशासन को लोगों की विरोध का भी सामना करना पडा है.
सिमडेगा सिविल सर्जन डॉ सुंदर मोहन सामद ने भी जिले में सर्पदंश के अधिक मामलो की बात स्वीकारते हुए कहा कि ओझाओं के चक्कर में लोग ईलाज के लिए देर से पंहुचते हैं कई बार तो लोग अस्पताल तक भी नहीं पंहुच पाते झाडफुंक के चक्कर में जान गवां देते हैं. सिविल सर्जन ने बताया कि पूर्व जिले में ओझागुणी के खिलाफ स्पेशल ड्राइव चलाई गई थी. जिसमें ओझाओं को चिन्हित करते हुए कार्रवाई की जाती थी. एक बार फिर से ओझागुणी की खिलाफ उसी तरह की ड्राइव चलाने की आवश्यकता है. सिविल सर्जन ने लोगों से अपील की है कि लोग ओझा गुणी के चक्कर में न पडे. सर्पदंश के मामले होने पर जल्द से जल्द नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पंहुचे. उन्होने बताए कि सदर अस्पताल के साथ साथ जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश की दवा उपलब्ध है.
सर्पदंश की घटना के बाद लोग समय पर अस्पताल पंहुच जाएं तो शायद मृत्यु के आकंडो में कमी आ सके. लोगों से हमारी भी अपील है कि सर्पदंश का ईलाज झाडफुंक नहीं है. वे झाडफुंक के चक्कर में न फंसे समय रहते अस्पताल पंहुचे और अपनों की जान बचाएं.
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