सरायकेला: उपायुक्त की अध्यक्षता में बाल विवाह उन्मूलन के लिए एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन

सरायकेला: उपायुक्त की अध्यक्षता में बाल विवाह उन्मूलन के लिए एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन

सरायकेला उपायुक्त की अध्यक्षता में बाल विवाह उन्मूलन के लिए एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन

संतोष कुमार/न्यूज़11 भारत

सरायकेला/डेस्क: आज समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त सरायकेला–खरसावाँ नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में “बाल विवाह उन्मूलन एवं रोकथाम” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में अनुमंडल पदाधिकारी सरायकेला श्रीमती निवेदिता नियति, अनुमंडल पदाधिकारी चांडिल विकास राय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव तौसीफ़ मिराज, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती सत्या ठाकुर, जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री कैलाश मिश्रा, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी,सभी अंचलधिकारी, सभी CDPO, सभी BEEO, विभिन्न विद्यालय एवं महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य, सभी महिला पर्यवेक्षका उपस्थित रहे. कार्यक्रम का उद्देश्य बाल विवाह निषेध अधिनियम से संबंधित कानूनी प्रावधानों का प्रसार, रोकथाम हेतु विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करना तथा समाज में व्यापक जागरूकता स्थापित करना था.

अपने संबोधन में उपायुक्त सिंह ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक कुरीति है, जो बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, मानसिक विकास और भविष्य की संभावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित करती है. उन्होंने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार लड़कियों की विवाह आयु अठारह वर्ष तथा लड़कों की इक्कीस वर्ष निर्धारित है और इस कानून का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. उपायुक्त ने बताया कि कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं की शिक्षा बाधित होती है, स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की संभावनाएँ सीमित हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन और समाज को मिलकर इस कुरीति के उन्मूलन के लिए समन्वित, संवेदनशील और निर्णायक प्रयास करने होंगे.

उपायुक्त सिंह ने कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में बाल विवाह रोकथाम से संबंधित विशेष कार्यशालाओं का आयोजन सुनिश्चित करें. उन्होंने कहा कि इन कार्यशालाओं में बालिकाओं, किशोरियों और महिलाओं के लिए संचालित केंद्र एवं राज्य सरकार की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, कौशल विकास तथा महिला सशक्तिकरण योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की जाए तथा जो लाभार्थी अब तक इन योजनाओं से वंचित हैं, उन्हें चिह्नित कर आवेदन प्रक्रिया और पात्रता संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाए. उपायुक्त ने कहा कि योजनाओं से अधिकाधिक लाभार्थियों को जोड़ने से समाज में सकारात्मक, व्यावहारिक और स्थायी परिवर्तन संभव हो सकेगा.

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव श्री तौसीफ़ मिराज ने बाल विवाह निषेध अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी प्रदान की. उन्होंने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम केवल प्रशासनिक या कानूनी दायित्व नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों की संयुक्त जिम्मेदारी है. उन्होंने बताया कि बाल विवाह बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, मानसिक स्थिरता और सामाजिक संरक्षण को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, और इस कुरीति को रोकने के लिए समाज में निरंतर जागरूकता और सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने कहा कि बाल विवाह करवाने, समर्थन देने या इसकी जानकारी छिपाने वाले व्यक्तियों पर भी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है, इसलिए नागरिकों का कर्तव्य है कि वे किसी भी संदिग्ध प्रकरण की सूचना तत्काल प्रशासन को उपलब्ध कराएँ.

कार्यशाला के दौरान नुआगाँव निवासी बेबी महतो ने बाल विवाह के विरुद्ध अपने संघर्षपूर्ण अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि परिवार के दबाव में उनका विवाह लगभग दो वर्ष पूर्व ही तय कर दिया गया था, जबकि वे उस समय कक्षा नौवीं की छात्रा थीं और अपनी शिक्षा जारी रखना चाहती थीं. उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अपने शिक्षक को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद शिक्षक द्वारा यह मामला संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी तक पहुँचाया गया. प्रशासन के तत्काल हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप उनका विवाह निर्धारित तिथि से एक दिन पूर्व ही रोक दिया गया. बेबी माटो ने कहा कि विद्यालय, प्रशासन और समुदाय के सहयोग से उन्हें शिक्षा जारी रखने का अवसर मिला, जिससे बाल विवाह के विरुद्ध उनका संकल्प और अधिक सशक्त हुआ है.

कार्यशाला के दौरान बाल विवाह पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का सरायकेला–खरसावाँ जिले से औपचारिक शुभारंभ भी किया गया. उपायुक्त श्री सिंह ने कहा कि यह फिल्म बाल विवाह के सामाजिक, स्वास्थ्य एवं कानूनी पहलुओं को सरल, प्रभावशाली और तथ्यपरक रूप में प्रस्तुत करती है. उन्होंने बताया कि इस डॉक्यूमेंट्री को जिले में संचालित जागरूकता वाहनों के माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों, शहरी बस्तियों, विद्यालय परिसरों तथा समुदाय-आधारित कार्यक्रमों में प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे अधिकाधिक लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जा सके और समाज में व्यवहारिक परिवर्तन सुनिश्चित किया जा सके.

कार्यशाला के अंत में उपायुक्त सिंह ने सभी उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं तथा प्रतिभागियों को बाल विवाह उन्मूलन के लिए शपथ दिलाई. इस अवसर पर नुआगाँव निवासी बेबी महतो को बाल विवाह के विरुद्ध साहसपूर्वक आवाज उठाने, अपनी शिक्षा जारी रखने तथा जिले की अन्य बालिकाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनने हेतु प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. उपायुक्त ने कहा कि ऐसे उदाहरण समाज में सकारात्मक संदेश स्थापित करते हैं और बाल विवाह उन्मूलन अभियान को और प्रभावी 

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