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सिमडेगा/डेस्क: शहर के मार्केट कॉम्प्लेक्स की दुकानों के नए किराया निर्धारण को चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव दीपक रिंकू ने गलत बताया है. सचिव दीपक रिंकू ने अनुमंडल पदाधिकारी सुमंत तिर्की को ज्ञापन सौंपकर नगर परिषद द्वारा वर्ष 2025 में किए गए नए किराया निर्धारण को वापस लेने तथा इसके स्थान पर एकरारनामा एवं प्रचलित नियमों के अनुरूप केवल किराया वृद्धि करने की मांग की है. चैंबर सचिव का कहना है कि बार-बार नया किराया निर्धारण करना न केवल अनुबंध की भावना के विपरीत है,बल्कि इससे दुकानदारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है.
चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव दीपक रिंकू ने अपने आवेदन में बताया कि वर्ष 1998 में तत्कालीन अनुमंडल प्रशासन द्वारा शहर में मार्केट कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर दुकानों का आवंटन किया गया था. उस समय प्रति वर्गफुट दो रुपये की दर से किराया निर्धारित किया गया था तथा सभी दुकानदारों के साथ विधिवत एकरारनामा भी किया गया था. बाद में वर्ष 2012 में किराया बढ़ाकर 10 रुपये प्रति वर्गफुट कर दिया गया.
इस वृद्धि को लेकर कुछ दुकानदारों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और मामला आज भी न्यायालय में विचाराधीन है. आवेदन में कहा गया है कि न्यायालय में मामला लंबित रहने के बावजूद नगर परिषद ने वर्ष 2025 में दुकानों का पुनः किराया निर्धारण करते हुए 24 से 25 रुपये प्रति वर्गफुट की नई दर तय कर दी है. चैंबर सचिव का तर्क है कि किसी भी दुकान का किराया आवंटन के समय एक बार निर्धारित किया जाता है और उसके बाद एकरारनामा की शर्तों के अनुसार समय-समय पर किराया वृद्धि की जाती है. बार-बार नया किराया निर्धारण करना न तो अनुबंध की शर्तों के अनुरूप है और न ही न्यायसंगत.
चैंबर सचिव दीपक रिंकू ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि जमीन का सर्किल रेट समय-समय पर बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है,लेकिन केवल सर्किल रेट को आधार बनाकर बार-बार नया किराया तय करना व्यवहारिक नहीं है. इससे छोटे एवं मध्यम वर्ग के व्यवसायियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है. कई दुकानदार बढ़े हुए किराये का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं,जिसके कारण किराया बकाया रहने की समस्या बढ़ रही है. इससे नगर परिषद को भी अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा है. चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव दीपक रिंकू का कहना है कि यदि एकरारनामा की शर्तों के अनुरूप नियमानुसार किराया वृद्धि की व्यवस्था लागू की जाती है तो दुकानदारों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और वे नियमित रूप से किराया जमा कर सकेंगे.
इससे नगर परिषद का राजस्व संग्रह भी बेहतर होगा और अनावश्यक विवादों से बचा जा सकेगा. ज्ञापन के माध्यम से दीपक रिंकू ने अनुमंडल पदाधिकारी से पूरे मामले की गंभीरता एवं सहानुभूतिपूर्वक समीक्षा करने का आग्रह किया है. साथ ही नगर परिषद द्वारा जारी वर्तमान किराया निर्धारण आदेश को वापस लेकर अनुबंध एवं नियमों के अनुरूप केवल किराया वृद्धि की व्यवस्था लागू करने की मांग की है. चैंबर ने आशा व्यक्त की है कि प्रशासन इस विषय पर सकारात्मक पहल करेगा,जिससे व्यापारियों के हितों की रक्षा होने के साथ-साथ नगर परिषद के राजस्व हित भी सुरक्षित रह सकेगा.
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