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रांची/डेस्क: झारखंड की राजनीति में एक और उपचुनाव की आहट अब तेज होने लगी है. घाटशिला विधानसभा सीट पर संभवता बिहार के साथ ही होने जा रहे इस उपचुनाव को लेकर जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा के अपने दावे है, वहीं बीजेपी को इस सीट पर बड़े उल्टफेर की उम्मीद है.
पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद खाली हुई सीट
शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के साथ खाली हुए घाटशिला सीट को लेकर झामुमो और सरकार की सहयोगी कांग्रेस का कहना है कि घाटशिला की जनता इस बार भी महागठबंधन के साथ खड़ी है. झामुमो की घाटशिला विधानसभा कमेटी ने तो उम्मीदवार का नाम भी तय कर दिया है. दिवंगत विधायक रामदास सोरेन के बड़े बेटे सोमेश सोरेन को चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय ले लिया गया है. इसकी जानकारी झामुमो केंद्रीय कमेटी को भी भेज दी गई है.
मधुपुर और डुमरी उपचुनाव की तरह यहां भी ‘सहानुभूति कार्ड’
JMM का मानना है कि मधुपुर और डुमरी उपचुनाव की तरह यहां भी ‘सहानुभूति कार्ड’ और पार्टी की संगठनात्मक मजबूती जीत के अंतर को बढ़ा देगा. मधुपुर और डुमरी उपचुनाव की तरह क्या यहां भी उम्मीदवार को पहले मंत्री बनाया जाएगा, इस सवाल के जवाब में मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने कहा कि यह फैसला पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को लेना है.
बीजेपी ने भी कसी कमर
उपचुनाव के आहट के बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी मोर्चा संभाल लिया है. बीजेपी का कहना है कि हर चुनाव हमारे लिए महत्वपूर्ण है और घाटशिला की जनता इस बार भाजपा के उम्मीदवार को ही चुनकर विधानसभा भेजेगी. इस सीट पर पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार कौन होगा या फैसला प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व को लेना है. हालांकि, इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन और उनके बेटे बाबूलाल सोरेन की सक्रियता इस सीट पर अभी से ही दिखनी शुरू हो गई है.
कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल होगी बीजेपी ?
बड़ा सवाल यह है कि क्या घाटशिला उपचुनाव भी मधुपुर और डुमरी की तरह झामुमो के लिए जीत का सेफ ज़ोन साबित होगा या फिर भाजपा यहां से कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल होगी? सोमेश सोरेन पिता की राजनीतिक विरासत और सहानुभूति के दम पर जनता का दिल जीत पाएंगे, या बीजेपी की रणनीति बाज़ी पलटेगी.
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