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रांची/डेस्क: झारखंड का सारंडा सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. एक तरफ जहां नक्सलियों की गोलियां और उनके आईईडी सुरक्षाबलों के लिए परेशानियां खड़ी करती है तो वही कुदरत का भी कहर सुरक्षाबलों की परीक्षा लेता रहता है और इसी कुदरत की मार सारंडा के जंगलों में एक बार फिर देखने को मिली जिसके आगोश में बिहार के औरंगाबाद के सपूत राकेश कुमार आ गए और अपनी ड्यूटी का निर्वहन करते हुए शहीद हो गए.
झारखंड में नक्सलियों का आखिरी तिलिस्म अब उजड़ने के कगार पर है. सुरक्षाबल के जवान भी अपना पूरा जोर लगाए हुए है ताकि नक्सलियों के खिलाफ बनी मजबूत पकड़ ढीली न पड़ा जाए. इसके लिए सुरक्षाबलों को हर पल.अपनी जाना की बाजी लगानी पड़ती है क्योंकि यहां घने जंगलों में न सिर्फ नक्सली बल्कि कुदरत भी अपना क्रूर छेड़ा समय समय दिखाती रहती है जिसकी बानगी एक बार फिर देखने को मिली जिसमें कोबरा 210 बटालियन के जवान राकेश कुमार शहीद हो गए. राकेश कुमार को रांची के सीआरपीएफ के 133 कैंप में श्रद्धांजलि दी गई. जिसमें सीआरपीएफ आईजी और झारखंड पुलिस के वरीय अधिकारी शामिल हुए. सबों ने नाम आंखों से तरह कुमार श्रद्धा सुमन अर्पित किए.
वही मामले में जानकारी देते हुए आईजी ऑपरेशन ने बताया कि जवान राकेश कुमार ड्यूटी के बाद अपने कैम्प में पहुंचे थे लेकिन देर रात आई तेज आंधी और बारिश के कारण पेड़ का एक बड़ा टुकड़ा राकेश कुमार के ऊपर गिरा जिस कारण उनके सिर पर चोट लगी जिस कारण राकेश कुमार घायल हो गए जिसके बाद राकेश को एयरलिफ्ट कर रांची लाए गया लेकिन यहां पहुंचने तक उनकी मौत हो गई. बता दें कि सारंडा में पेड़ गिरने के कारण जवान की मौत होना भले पहला मामला हो लेकिन सांप काटने, वज्रपात और मलेरिया के कारण जवानों की जान जाती रही है.
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