मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: झारखंड जनशक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शेख वकील अहमद ने देश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के बहाने विशेष समुदाय के लोगों को निशाना बनाते हुए वोटर लिस्ट से उनके नाम हटाने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है.
शेख वकील अहमद ने कहा कि चुनाव आयोग का मूल दायित्व वोटर सूची को सही रखना है, जिसमें मृत व्यक्तियों के नाम हटाना, 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं के नाम जोड़ना तथा निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना शामिल है. लेकिन वर्तमान में SIR के नाम पर जिस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, उससे आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
उन्होंने कहा कि यदि सीमा पार से घुसपैठ का मामला है तो उस पर कार्रवाई करना सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है. लेकिन उसकी आड़ में देश के नागरिकों के नाम वोटर सूची से हटाना उचित नहीं है. उन्होंने इसे नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया.
झारखंड जनशक्ति मोर्चा के अध्यक्ष ने न्यायपालिका से भी इस मामले का संज्ञान लेने की अपील करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया को तत्काल भंग किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी नागरिक के मतदान अधिकार पर आंच न आए.
शेख वकील अहमद ने सुझाव दिया कि पूरे देश में मतदाता सूची को आधार नंबर से लिंक किया जाए, जिससे एक व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह दर्ज होने की स्थिति स्वतः समाप्त हो सके.
उन्होंने यह भी कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा गृह मंत्रालय के अधीन है, जिस पर हर साल अरबों रुपये खर्च किए जाते हैं. ऐसे में यदि घुसपैठ हो रही है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. उन्होंने आशंका जताई कि कहीं इस मुद्दे को चुनावी एजेंडा बनाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है.
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