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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने बड़े आर्थिक अपराध के आरोपी अमित गुप्ता को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा है कि वह यह साबित करने में असफल रहे हैं कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया दम नहीं है. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की एकल पीठ ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया.
अदालत ने क्या कहा
अदालत ने अपने निर्णय में मामले की गंभीरता और अपराध की प्रकृति पर विशेष जोर दिया. कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह मामला बहुत गंभीर और आर्थिक तंत्र की नींव को प्रभावित करने वाला है, क्योंकि यह बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर और संगठित धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है.
गंभीर आर्थिक अपराध: कोर्ट के अनुसार, यह मामला देश की आर्थिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाले गहरे वित्तीय अपराधों से संबंधित है.
संगठित धोखाधड़ी का आरोप: जांच के दौरान सामने आया कि सैकड़ों करोड़ रुपये के फर्जी लेनदेन जटिल लेयरिंग के जरिये किए गए.
अमित गुप्ता की कथित भूमिका: गुप्ता पर 135 शेल कंपनियों का नेटवर्क खड़ा करने, फर्जी GST इनवॉइस, गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और फर्जी ई-वे बिल तैयार करने का आरोप है. इससे सरकारी खजाने को भारी क्षति पहुंची.
गलत संदेश की आशंका: अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा और आर्थिक अपराधों पर लगाम लगाने के प्रयास कमजोर पड़ेंगे.
सबूतों की जिम्मेदारी: कोर्ट ने PMLA की धारा 24 का हवाला देते हुए कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में यह आरोपी की जिम्मेदारी है कि वह साबित करे कि अपराध की आय से उसका कोई संबंध नहीं है.
गिरफ्तारी की वैधता बरकरार: अदालत ने माना कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PMLA की धारा 19 के तहत सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए गुप्ता को गिरफ्तार किया था.
क्या है मामला ?
अमित गुप्ता पर आरोप है कि वह 135 शेल कंपनियों के माध्यम से ₹750 करोड़ से अधिक के फर्जी GST इनवॉइस जारी करने वाले एक संगठित रैकेट का हिस्सा थे. इस रैकेट के जरिए अवैध रूप से ITC हासिल किया जाता था और फिर अपराध की कमाई को विभिन्न चैनलों के माध्यम से लॉन्ड्र किया जाता था. प्रवर्तन निदेशालय ने गुप्ता को 8 मई 2025 को गिरफ्तार किया था.
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