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गिरिडीह/डेस्क: गिरिडीह जिले की गोरहद पंचायत में 3.3 एकड़ संधारित जमीन की जमाबंदी रद्द करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. रामजी साव एवं अन्य की याचिका पर कोर्ट ने निर्माणाधीन पानी टंकी के कार्य पर लगी रोक को बरकरार रखा हैं. मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई हैं.
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता रंजन कुमार ने कोर्ट में पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि जिला भूदान, गिरिडीह द्वारा प्रति कुल सर्टिफिकेट 80 हजार रुपये, कुल 2.40 लाख रुपये की मांग की गई थी. साथ ही यह भी कहा गया कि न्यायालय द्वारा कोई सर्टिफिकेट या नोटिस उपलब्ध कराने का निर्देश नहीं दिया गया था, बावजूद इसके प्रार्थी को सर्टिफाइड कॉपी देने से इनकार कर दिया गया. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने प्रार्थी के अधिवक्ता को निर्देश दिया था कि सभी तथ्यों को एफिडेविट के माध्यम से प्रस्तुत करें. वहीं, सरकारी पक्ष द्वारा निर्माण कार्य शुरू करने की मांग को कोर्ट ने खारिज करते हुए विवाद के समाधान पर ध्यान देने की बात कही थी.
इस मामले में झारखंड सरकार गोरहद पंचायत की लगभग 5 एकड़ जमीन पर पानी टंकी का निर्माण करा रही थी. याचिकाकर्ता रामजी साव का कहना है कि उनके पूर्वजों के नाम 1965-66 में 3.3 एकड़ जमीन की जमाबंदी दर्ज थी, जिसे एसडीओ कोर्ट ने बिना पक्ष सुने एकतरफा रद्द कर दिया. वादी ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में अंचलाधिकारी, राजस्व कर्मचारी और पंचायत मुखिया की मिलीभगत रही थी.
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