प्रमोद कुमार/न्यूज़11 भारत
बरवाडीह/डेस्क: प्रखंड क्षेत्र के उक्कामाड़ पंचायत अंतर्गत भालू डेरा गांव इन दिनों विकास योजनाओं को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है. ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों का लाभ व्यापक रूप से पहुंचाने के बजाय अधिकांश योजनाओं को एक ही स्थान पर केंद्रित कर दिया गया है. महज लगभग 100 मीटर के दायरे में तीन तालाब निर्माण एवं जीर्णोद्धार योजनाओं के साथ एक नाली निर्माण योजना स्वीकृत की गई है, जिससे योजनाओं की आवश्यकता, उपयोगिता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं. ग्रामीणों के अनुसार इस छोटे से क्षेत्र में एक के बाद एक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जबकि पंचायत के कई अन्य गांव और टोले अब भी मूलभूत विकास कार्यों की प्रतीक्षा कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरे उक्कामाड़ पंचायत का विकास केवल भालू डेरा के इसी 100 मीटर क्षेत्र तक सीमित होकर रह गया हो.
पहले से बने तालाब का फिर जीर्णोद्धार
ग्रामीणों का कहना है कि भूमि संरक्षण विभाग द्वारा लगभग दो से तीन वर्ष पूर्व जिस तालाब का निर्माण कराया गया था, वह आज भी अस्तित्व में है और उसमें पर्याप्त मात्रा में पानी मौजूद है. इसके बावजूद उसी तालाब को जिला परिषद मद से जीर्णोद्धार योजना में शामिल कर दिया गया है. स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब तालाब उपयोग में है और उसमें पानी भी भरा हुआ है तो फिर उसके जीर्णोद्धार की आवश्यकता क्यों पड़ी. ग्रामीणों ने योजना की तकनीकी स्वीकृति और कार्य चयन प्रक्रिया की जांच की मांग की है.
खेत को दिखाया तालाब, अब उसी मिट्टी से हो रहा दूसरा काम
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उक्त तालाब के समीप सांसद मद से लगभग एक वर्ष पूर्व एक अन्य तालाब निर्माण कराया गया था. लेकिन मौके की स्थिति देखने पर वह स्थान आज भी खेत जैसा प्रतीत होता है. लोगों का दावा है कि तालाब निर्माण के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की गईं और वास्तविक रूप से तालाब विकसित नहीं हो सका. आरोप यह भी है कि उसी स्थान से निकाली गई मिट्टी को बगल में स्थित पुराने तालाब के किनारों पर डालकर जीर्णोद्धार कार्य दिखाया जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे कार्य की गुणवत्ता और सरकारी राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.
जिला परिषद की योजना पर भी उठ रहे सवाल
ग्रामीणों के अनुसार जिला परिषद मद से लगभग 4.03 लाख रुपये की लागत से संचालित तालाब जीर्णोद्धार योजना में भी कई अनियमितताएं दिखाई दे रही हैं. योजना स्थल पर सूचना पट्ट नहीं लगाया गया है, जिससे योजना की लागत, कार्य अवधि और संवेदक से संबंधित जानकारी आम लोगों को उपलब्ध नहीं हो पा रही है. लोगों का आरोप है कि तालाब के किनारों पर केवल मिट्टी चढ़ाकर कार्य पूरा दिखाने का प्रयास किया गया है, जबकि वास्तविक जीर्णोद्धार का कार्य धरातल पर दिखाई नहीं देता.
चौथी योजना नाली निर्माण, लेकिन काम शुरू तक नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि इसी क्षेत्र में एक नाली निर्माण योजना भी स्वीकृत है. हालांकि हैरानी की बात यह है कि अब तक इस योजना पर कार्य शुरू ही नहीं किया गया है. इससे यह सवाल उठ रहा है कि योजनाओं की स्वीकृति तो दी जा रही है, लेकिन उनके क्रियान्वयन और निगरानी को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही.
कार्य अवधि समाप्त, फिर भी बताया जा रहा निर्माणाधीन
जब इस संबंध में कनीय अभियंता अभय मिश्रा से दूरभाष पर जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित कार्य अभी भी प्रगति पर है. वहीं ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं की निर्धारित कार्य अवधि दो माह थी, जो अब समाप्त हो चुकी है. इसके बावजूद कार्य को "रनिंग" बताया जाना कई नए सवालों को जन्म देता है.
बरसात से पहले जांच नहीं हुई तो बह सकती है सच्चाई
ग्रामीणों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून की बारिश शुरू होने वाली है. यदि कार्यों में केवल मिट्टी भराई और खानापूर्ति की गई है, तो बारिश के बाद इन योजनाओं की वास्तविक स्थिति स्वतः सामने आ जाएगी. लोगों ने जिला प्रशासन, जिला परिषद और संबंधित विभाग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक ही क्षेत्र में चार-चार योजनाएं संचालित होने के बावजूद अपेक्षित विकास नहीं दिख रहा है, तो यह जांच का विषय है कि आखिर सरकारी धन का उपयोग किस प्रकार किया गया और उसका वास्तविक लाभ किसे मिला.
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