शुभेंदु गुप्ता /न्यूज 11 भारत
देवघर डेस्क: उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा द्वारा बुधवारको कृषि विज्ञान केंद्र सुजानी के प्रशिक्षण हॉल में समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर उर्वरक अनुज्ञप्ति धारक के लिए 15 दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया. जिसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए 40 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उद्घाटन के अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्र सुजानी भी उपस्थित रहे.
उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य उर्वरक विक्रेताओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जब विक्रेता स्वयं वैज्ञानिक पहलुओं से अवगत होंगे, तभी वे किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य और संतुलित खाद के उपयोग के प्रति सही जानकारी दे सकेंगे. आगे उपायुक्त ने प्रतिभागियों से अपील करते हुए कहा,"विक्रेता केवल व्यापार न करें, बल्कि किसानों तक सही जानकारी पहुँचाकर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहयोग करें. उन्होंने संतुलित उर्वरक प्रयोग को भविष्य की खेती के लिए जीवनदायी बताया. साथ ही इस कोर्स के माध्यम से विक्रेताओं को मिट्टी परीक्षण, सॉइल हेल्थ कार्ड का महत्व और रसायनों के साथ-साथ जैविक खादों के समन्वय के बारे में विस्तार से प्रशिक्षित किया जाएगा. आगे प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विक्रेताओं को नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों के सही अनुपात और जैविक खादों के महत्व के बारे में विस्तार से बताया जाएगा.
मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि बिना प्रशिक्षण का उर्वरक बेचने के लिए लाईसेंस नहीं मिलेगा. इसलिए सबों को नियमित क्लास करना आवश्यक है. कहा कि इस प्रशिक्षण में नैनो यूरिया सहित अन्य सभी उर्वरकों की जानकारी विस्तार से दी जाएगी. कहा कि अच्छे से सभी प्रशिक्षण प्राप्त करें, ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद किसानों को अच्छे से समझाया जा सके. वहीं कृषि विज्ञान केन्द्र देवघर के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ. राजनकुमार ओझा ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य रूप से मिट्टी जांच का महत्व, आवश्यक पोषक तत्व, पोषक तत्व की कमी, प्रभाव एवं लक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड का महत्व, मृदा सुधार, उर्वरक में समानुपात मिलावट, जैव उर्वरक का रख-रखाव, आवश्यक फसलों में अनुशंसित मात्रा में पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक खेती एवं उसके अवयव, उर्वरक के उपयोग की विधि, मिट्टी नमूना लेने की विधि, जैव उर्वरक के महत्व आदि विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पर दिया जा रहा है, जो उर्वरक अनुज्ञप्ति धारक के लिए है.
कृषकों को जोड़े वैज्ञानिक पद्धति से
इसके अलावा उपायुक्त ने कृषि विज्ञान केंद्र सुजानि में संचालित शोध व प्रसार गतिविधियों का निरीक्षण किया. साथ ही उन्होंने मृदा परीक्षण, मशरूम, मसलों की खेती और वर्मी कंपोस्ट इकाई का निरीक्षण कर केवीके द्वारा किसानों के हित में हो रहे कामों की सराहना की. इस अवसर पर उपरोक्त के अलावा असिस्टेंट डायरेक्टर इग्नू, जिला पशुपालन पदाधिकारी देवघर एस. स्वाइन, पशु वैज्ञानिक डॉ. पूनम सोरेन, डॉ विवेक कश्यप, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी रोहित कुमार विद्यार्थी, केवीके देवघर के अधिकारी सहित सभी 40 प्रतिभागी उपस्थित थे.
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