चूरी सपही नदी पुल क्षतिग्रस्त: भारी वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध, गुणवत्ता और जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

सुरक्षा के मद्देनज़र प्रशासन का फैसला, ग्रामीणों ने निर्माण में अनियमितता की जांच की उठाई मांग

By : Admin
चूरी सपही नदी पुल क्षतिग्रस्त: भारी वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध, गुणवत्ता और जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

मुमताज अहमद/न्यूज11  भारत 

खलारी/डेस्क: खलारी प्रखंड अंतर्गत चूरी सपही नदी पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने एहतियातन बड़ा कदम उठाते हुए पुल पर भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. पुल की वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव के उद्देश्य से यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है.

खलारी पुलिस प्रशासन द्वारा पुल के दोनों छोर पर ड्रम एवं अवरोधक लगाकर बड़े वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्री बस, स्कूल बस, ट्रक, हाइवा सहित सभी प्रकार के भारी वाहन अब इस मार्ग से होकर नहीं गुजरेंगे. हाल के दिनों में पुल के कुछ हिस्सों में दरार एवं संरचनात्मक कमजोरी देखी गई थी, जिसके बाद सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया गया. प्रशासन का मानना है कि भारी वाहनों के दबाव से पुल को और नुकसान पहुंच सकता है तथा बड़ी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

फिलहाल दोपहिया एवं छोटे निजी चारपहिया वाहनों को सीमित रूप से आवागमन की अनुमति दी गई है. वाहन चालकों को नियंत्रित गति से पुल पार करने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है. नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.

इधर, पुल पर प्रतिबंध लगने के साथ ही ग्रामीणों ने दबी जुबान से आलोचना करते हुए कह रहे हैं कि पुल निर्माण के समय ही संवेदक द्वारा भारी अनियमितता बरती गई थी. उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बना यह पुल महज लगभग 15 वर्षों में जर्जर हो गया, जो निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है.

ग्रामीणों का कहना है कि जनता के टैक्स के पैसों से बनने वाले पुल, सड़क, नाला-नाली जैसे स्थायी ढांचों का निर्माण तकनीकी मानकों और गुणवत्तापूर्ण सामग्री के साथ होना चाहिए, ताकि वे लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बने रहें. बार-बार मरम्मत या पुनर्निर्माण से न केवल सरकारी धन की बर्बादी होती है, बल्कि अन्य विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं.

लोगों ने संवेदक, निर्माण कम्पनी, संबंधित विभागीय अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों की भूमिका की जांच की मांग की है. उनका कहना है कि प्रशासन का कार्य केवल पुल पर ड्रम लगाकर आवागमन रोकना भर नहीं होना चाहिए, बल्कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच, गुणवत्ता की समीक्षा और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करना भी उतना ही जरूरी है.

ग्रामीणों ने मांग की है कि पुल निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की पारदर्शी जांच कराई जाए, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की समीक्षा हो और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए. साथ ही भविष्य में बनने वाले पुल एवं सड़कों के लिए सख्त मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की जाए, ताकि संरचनाएं वर्षों तक टिकाऊ रहें और विकास का वास्तविक लाभ जनता को मिल सके.

फिलहाल भारी वाहनों पर प्रतिबंध लागू है, लेकिन क्षेत्रवासियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या केवल अस्थायी रोक से स्थिति संभलेगी या फिर इस मामले में व्यापक जांच और ठोस कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए..

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