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रांची/डेस्कः- झारखंड सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के तहत राज्यभर में धान अधिप्राप्ति अभियान की शुरुआत 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) से करने जा रही है. इस ऐतिहासिक पहल को सफल बनाने के लिए राज्य के स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अभूतपूर्व जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का परिचय दिया है.
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी स्वयं सभी मंत्रियों, सांसदों एवं विधायकों को व्यक्तिगत रूप से फोन कर कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह कर रहे हैं. यह पहल यह दर्शाती है कि मंत्री जी किसानों के मुद्दे को लेकर कितने गंभीर, संवेदनशील और प्रतिबद्ध हैं.
डॉ. अंसारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“हर हाल में कार्यक्रम में उपस्थित रहकर किसानों का मनोबल बढ़ाना चाहिए. यदि किसी कारणवश भौतिक रूप से उपस्थित होना संभव न हो, तो ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित कर किसानों को अपना समर्थन अवश्य दें.
मंत्री जी ने राज्य के सभी जिलों के आपूर्ति पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे स्वयं अपने-अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित कर धान अधिप्राप्ति केंद्रों पर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ सुनिश्चित करें.
डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि इस वर्ष राज्य में खेती बेहद अच्छी हुई है, जिससे पूरे झारखंड के किसानों में खुशी की लहर है. इसी को और मजबूती देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए धान बिक्री पर बोनस सहित ₹2,450 प्रति क्विंटल का एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित किया है. इससे किसानों में भारी उत्साह है और वे सरकार के प्रति आभार जता रहे हैं.
उन्होंने कहा-
“किसानों को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना हमारी सरकार का धर्म और दायित्व है. हमारी मंशा साफ है—किसानों को हर सुविधा, हर सहयोग और हर सुरक्षा उपलब्ध कराना.”
पूरे राज्य में माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी की इस किसान-हितैषी पहल की व्यापक प्रशंसा हो रही है. राज्यभर में 783 धान अधिप्राप्ति केंद्रों का चयन किया जा चुका है और सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं.
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने दो-टूक अपील करते हुए कहा
“आप सभी जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से ही यह अभियान जन-आंदोलन बनेगा. किसानों को यह भरोसा दिलाना हम सबकी जिम्मेदारी है कि सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है.”
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी द्वारा स्वयं जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर कार्यक्रम में शामिल होने की अपील को राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक जिम्मेदार, संवेदनशील और जमीनी मंत्री की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है. यह स्पष्ट संदेश है कि झारखंड सरकार और उसके मंत्री किसानों के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे.