मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: जिस विद्यालय में बच्चों के भविष्य की नींव रखी जानी चाहिए, वही विद्यालय आज असामाजिक तत्वों की करतूतों से शर्मसार हो रहा है. खलारी प्रखंड का राजकीयकृत मध्य विद्यालय बुकबुका इन दिनों शराबियों और जुवारियों का सुरक्षित ठिकाना बन गया है. हालात यह हैं कि सुबह जब बच्चे पढ़ने पहुंचते हैं तो विद्यालय परिसर में जगह-जगह शराब की खाली बोतलें, प्लास्टिक के गिलास और जुए के निशान बिखरे मिलते हैं. यह दृश्य न केवल शिक्षा के मंदिर की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है, बल्कि नौनिहालों के मानसिक और नैतिक विकास पर भी प्रतिकूल असर डाल रहा है.
विद्यालय में चाहरदीवारी नहीं होने का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व दिन ढलते ही परिसर में जुट जाते हैं. यहां खुलेआम शराब पी जाती है और जुआ खेला जाता है. कई बार शिक्षकों ने उन्हें रोकने और समझाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि बात विवाद और झड़प तक पहुंच गई. इससे विद्यालय के शिक्षक खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं.
सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि इन सब परिस्थितियों के बीच छात्र-छात्राएं भय और असहज माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. अभिभावकों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश और चिंता है कि जिस स्थान पर उनके बच्चे शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं, वहां इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं.
विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमरलाल सतनामी ने बताया कि विद्यालय की सुरक्षा के लिए चाहरदीवारी निर्माण की मांग को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को लिखित आवेदन दिया गया है. उन्होंने कहा कि बार-बार अनुरोध के बावजूद आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई, जिसके कारण असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं. स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय परिसर की सुरक्षा के लिए अविलंब चारदीवारी का निर्माण कराया जाए और असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाए. उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया तो किसी दिन कोई बड़ी अप्रिय घटना भी हो सकती है. शिक्षा के मंदिर की इस दुर्दशा ने एक बार फिर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं—आखिर कब तक नौनिहाल शराब की बोतलों के साये में अपना भविष्य गढ़ने को मजबूर रहेंगे?
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