अरुण कुमार यादव/न्यूज11 भारत
गढ़वा/डेस्क: गढ़वा जिले में भाषा विवाद को लेकर संग्राम. पलामू प्रमंडल के भाजपा पार्टी के विधायक सत्ता पक्ष के विधायकों एवं वित्त मंत्री से मांग रहे है इस्तीफा, कहा नाकेबंदी कर नहीं घुसने देंगे किसी भी सत्ता पक्ष के नेता को. भाजपा के गढ़वा विधानसभा क्षेत्र से क्षेत्रीय विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के आवास पर आज भाजपा जिला कमेटी का प्रेसवार्ता किया गया. आज के इस प्रेसवार्ता में विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानू प्रताप साही एवं डॉ ईश्वर सागर चन्द्रवंशी मुख्य रूप से उपस्थित हुए.
मौके पर विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने कहा कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पता नहीं क्या हो गया है हमेशा गढ़वा पलामू को हिन् दृस्टि से देखते है जेटेट परीक्षा में भोजपुरी एवं मगही को नहीं रखना यह गलत है हमलोग के बच्चो पर इसका सीधा असर होगा. उन्होंने कहा की यंहा के वित्त मंत्री सरकार के कैबिनेट में ज़ब यह प्रस्ताव आया था तो उन्होंने इसका क्यों नहीं विरोध किया ये सभी मिले हुए है. जरूरत पड़ेगी तो हमलोग सरकार के सहयोग में जो नेता विधायक और मंत्री है उनका नाकेबंदी भी करेंगे.
वहीं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानू प्रताप साही ने कहा कि पलामू प्रमंडल के शिक्षित बेरोजगार के साथ छलने का काम कर रही हैं यह सरकार. वंही आने वाली पीढ़ी के साथ धोखाधड़ी कर रही है. 2016 में ज़ब रघुवर दास की सरकार थी उस समय जेटेट का परीक्षा हुआ था उस समय ये सभी भाषाएँ शामिल थी. हेमंत सरकार के जितने भी नुमाइंदे है वे सभी पलामू प्रमंडल के लोगो को बिहारी कहकर लज्जित कर रहे है. उन्होंने कहा की अगर झारखण्ड सरकार चाहती है कि पलामू से इन भाषाओ को विलुप्त किया जाए तो वे तीन काम करें.
पहले केंद्र को इन जगहों को केंद्र शाषित राज्य की अनुशंसा करें दूसरा सभी लोगो का वोटर लिस्ट से नाम काट दे नहीं तो इनकी सरकार है सभी लोगो को गोली मरवा दे. वहीं वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ ईश्वर सागर चंद्रवंशी ने कहा की पलामू के युवाओ के साथ धोखाधड़ी यह सरकार कर रही है वे नहीं चाहते है की यंहा के युवा नौकरी पा कर अपनी बेरोजगारी दूर करें. वंही भाजपा नेताओं के सरकार पर लगाए गए आरोप पर पूर्व मंत्री मिथलेश ठाकुर ने भी सवाल खड़ा किया है उनका कहना है की यदि वे इतना ही भाषा से प्यार करते है तो आखिर भोजपुरी और मगही में विधानसभा में शपथ क्यों नहीं लिए. मै शुरू से ही सरकार में ज़ब था तब भी भोजपुरी एवं मगही को शामिल करने के लिए सरकार को लिखा था और मिला था और विधायक नहीं रहने के बाद भी सरकार को मैंने भाषा को लेकर पत्राचार किया है. यंहा के जन प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से इस बात को लेकर सामूहिक रूप से मिलना चाहिए.
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