राजेश कुमार/न्यूज 11भारत
बोकारो थर्मल बेरमो/डेस्क: पेक थाना क्षेत्र ऊपरघाट के बरई पंचायत जुरामना गांव निवाशी प्रवासी मजदूर उमेश महतो का शव मंगलार को मुंबई से पैतृक आवास पहुंचा. तो परिजनों के हृदय विदारक चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो गया. मृतक उमेश महतो का शव गांव पहुंचते ही परिजनों सहित पत्नी पायल देवी और बुजुर्ग माँ मुनिया देवी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया . मृतक उमेश महतो मुम्बई में एसएन इंजीनियरिंग कंपनी में काम करता था. जिन्हें 31 दिसंबर को कार्य के दौरान विद्युत स्पर्धात के कपट में आ जाने से मौत हो गई थी. कंपनी के द्वारा मुआवजा नहीं मिलने के कारण शव साथी लोग नहीं उठा रहे थे.
सूचना मिलते ही समाजसेवी भुनेश्वर कुमार महतो ने मृतक के घर पहुंचकर परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया एवं कम्पनी से वार्ता कर शव को गांव लाने में सहयोग किया. सामाजिक संस्था के हेमंत महतो अपने सहयोगियों के साथ मुम्बई अस्पताल पहुंचकर कंपनी के सचिन कुमार से वार्ता कर शव को झारखंड भेजावाया. जिसमें तत्काल परिजनों के खाते में 3 लाख 21 हजार व बीमा का लाभ साथ ही ईपीएफ से परिजन को पेंशन देने पर सहमति बनी है.
उमेश महतो का शव पहुंचते ही स्थानीय विधायक जयराम महतो पहुंचे और परिजनों से मिल ढांढस बंधाया. मृतक का परिवार बेहद गरीब है. उमेश महतो अपने पीछे दिव्यांग पिता नारायण महतो, माता मुनिया देवी, पत्नी पायल देवी, पुत्र युवराज 2.5 वर्षीय व धीरज कुमार नौ माह सहित दो भाई को छोड़ गया.
वही प्रवासी मजदूरों के हितार्थ में कार्य कर रहे सह समाजसेवी भुनेश्वर कुमार महातो ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि झारखंड के विधायक, सांसद व मंत्री किसी तरह की मदद प्रवासी मजदूरों को नहीं करते हैं. मदद के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिया जाता है. राज्य सरकार को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रदान करने चाहिए, ताकि मजदूरों के पलायन और इस तरह ह्दय विदारक घटनाएं रोके जा सके. समाजसेवी नागेश्वर सिंह ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, उपायुक्त, सीओ व बीडीओ को ट्वीट कर शव को पैतृक गांव लाने की गुहार लगाता रहा. मुम्बई में वार्ता में संस्था के हेमंत महतो, दौलत महतो, अर्जुन महतो, भीम महतो, लाल यादव सहित कई थे.
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