फ़लक शमीम/न्यूज11 भारत
हजारीबाग/डेस्क: बांग्लादेश के ढाका जिला बोरिसल की रहने वाली मीतू अख्तर बिस्ती की कहानी किसी दर्दनाक दास्तां से कम नहीं. फेसबुक पर हुई एक दोस्ती ने उन्हें सरहदों के पार भारत तक ला दिया, लेकिन आज वही प्यार उनके लिए एक लंबा संघर्ष बन गया है.
ऑनलाइन शुरू हुई बातचीत
साल 2022 में हजारीबाग के चौपारण प्रखंड के एक युवक से मीतू की दोस्ती हुई. ऑनलाइन शुरू हुई बातचीत कुछ ही महीनों में प्यार में बदल गई. प्यार के अंधे विश्वास में युवक ने जुगाड़ कर उनके लिए फर्जी पहचान पत्र बनवाया और उन्हें बांग्लादेश से पहले कोलकाता और फिर मुंबई ले आया. मुंबई पहुंचने के बाद हालात इतने खराब हुए कि मीतू को बार डांसर बनकर अपनी जिंदगी चलानी पड़ी. आर्थिक तंगी के बीच भी दोनों साथ रहे, किराए के कमरे में रहकर किसी तरह अपना जीवन संभालने की कोशिश करते रहे.
हिंदू रीति-रिवाज से शादी की
मीतू बताती हैं कि वे मुस्लिम समुदाय से आती थीं, लेकिन युवक के परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया. जनवरी 2023 में उनका धर्म परिवर्तन कराया गया और फरवरी 2023 में दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली. शादी के बाद वे फिर मुंबई लौट आए और अपनी नई जिंदगी शुरू की.
नशे में ही डूबा रहता था पति
मुंबई में मीतू ने कड़ी मेहनत कर अपने पति के लिए गाड़ी तक खरीद दी, ताकि वह काम कर सकें और घर में मदद हो. लेकिन उनके मुताबिक पति हर दिन नशे में ही डूबा रहता था और किसी जिम्मेदारी को नहीं समझता था. फरवरी 2025 में युवक अपने घर चौपारण जाने की बात कहकर निकला और कहा कि कुछ दिनों में वापस आ जाएगा. लेकिन उस दिन के बाद वह कभी नहीं लौटा. मीतू ने लगातार फोन किए, घर वालों से बात करनी चाही, लेकिन किसी ने उनका फोन तक नहीं उठाया.
कौन मेरी मदद करेगा?
कुछ दिनों पहले जब मीतू खुद चौपारण गईं, तो उनके पति और परिजनों ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया. मीतू का कहना है कि यह उनके लिए सबसे बड़ा सदमा था, क्योंकि वह सिर्फ अपने पति से मिलने और सच्चाई जानने गई थीं. मुंबई में रहने के लिए पैसे खत्म हो चुके हैं. मीतू ने किराया देने और खाना चलाने के लिए अपनी कान की बालियाँ तक बेच दीं. भावुक होकर उन्होंने कहा..लेकिन आखिर कब तक ऐसे रहूँगी? कौन मेरी मदद करेगा?
मुझे मेरे देश भेज दें...
मीतू का कहना है कि वे स्थानीय प्रशासन से कई बार मदद की गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है. वह कहती हैं कि अब वे पूरी तरह टूट चुकी हैं और सिर्फ न्याय चाहती हैं. मीतू ने आखिरी अपील करते हुए कहा, “अगर इन सब में मेरी ही गलती है, तो 3 सालों में जो 15-16 लाख रुपए मैंने अपने पति पर खर्च किए. घर बनाने के लिए, गाड़ी खरीदने के लिए. वही पैसे वापस कर दें. मुझे मेरे देश भेज दें. बस मुझे न्याय चाहिए.
लेकिन दूसरे तरफ अब सवाल यह है कि बिना वीजा पासपोर्ट के वह भारत आई कैसे और अगर आई भी तो इन चार सालों में बिना पहचान पत्र के रह रही है... कैसे? फिलहाल हमने पति के पक्ष को भी जानना चाहा लेकिन पति और उसके परिजनों ने फोन नहीं उठाया. प्रशासनिक तौर से भी कोई ठोस जानकारी निकल कर सामने नहीं आई.
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