ब्योमकेश मिश्रा/न्यूज़11 भारत
चंदनकियारी/डेस्क: प्रखंड के योगिडीह गांव स्थित श्री श्री रामकृष्ण विवेकानन्द सेवाश्रम में महान संत एवं गुरु रामकृष्ण परमहंस देव की 191वीं जयंती श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाई गई. हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आश्रम परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, मंगलारती, चंडीपाठ, महाभोग वितरण एवं जरूरतमंदों के बीच वस्त्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम की अगुवाई सेवा आश्रम के अध्यक्ष अशोक सिंह, सचिव सुकुमार मुखर्जी तथा कोषाध्यक्ष मिहिर कुमार मुखर्जी ने की. इस अवसर पर अमलाबाद स्थित मंगलम कोलफिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशल्या अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.कार्यक्रम की शुरुआत विशेष पूजा, मंगलारती एवं चंडीपाठ से हुई. इसके पश्चात सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महाभोग ग्रहण किया. दूर-दराज के गांवों से आए गरीब, बुजुर्ग एवं दिव्यांग लोगों को नए वस्त्र वितरित किए गए. नए वस्त्र पाकर जरूरतमंदों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी.
सचिव सुकुमार मुखर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि रामकृष्ण परमहंस जी भारत के महान संतों में अग्रणी रहे हैं. उनका जन्म हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन द्वितीया, विक्रम संवत 1892 में हुआ था. बाल्यकाल में उनका नाम गदाधर था. वे एक साधारण ब्राह्मण परिवार से थे, किंतु बचपन से ही उनमें अध्यात्म, आस्था और धर्म के प्रति गहरी निष्ठा थी. वे मां काली के परम भक्त थे और उन्होंने अपना जीवन मानव सेवा एवं ईश्वर भक्ति को समर्पित कर दिया.
सालभर चलता है सेवा कार्य
कोषाध्यक्ष मिहिर कुमार मुखर्जी ने बताया कि आश्रम द्वारा केवल जयंती पर ही नहीं, बल्कि वर्षभर विभिन्न सेवा कार्य संचालित किए जाते हैं. इनमें गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, लड़कियों को सिलाई प्रशिक्षण, साप्ताहिक निःशुल्क चिकित्सा जांच शिविर तथा दुर्गा पूजा के अवसर पर अत्यंत जरूरतमंद परिवारों को नए वस्त्र वितरण शामिल हैं.उन्होंने कहा कि आश्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सेवा और सहयोग पहुंचाना है.
बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु
कार्यक्रम में अशोक बनर्जी, रामेश्वर कुंभकार, रामपोद दास, सचिन महतो, मधुसूदन घोषाल, राकेश मुखर्जी, अनूप कुमार, आरती मुखर्जी, वरनाली बनर्जी, षष्टी बनर्जी, चांदना देवी, कलबेरी देवी, हरधन महतो, गोपाल कुमार सहित आश्रम के सदस्य एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.समारोह का समापन ‘श्री रामकृष्ण कथा अमृत’ पाठ के साथ हुआ. पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला.
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