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नई दिल्ली/डेस्क: हनुमान जी की उपासना में सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ सबसे प्रभावशाली माना गया है. मान्यता है कि इन ग्रंथों के हर दोहे और चौपाई में गूढ़ रहस्य छिपा है, जो न केवल भक्त को भगवान की कृपा दिलाता है बल्कि जीवन को भी सफलता की दिशा में ले जाता है. ज्योतिष और धर्मग्रंथों के अनुसार, शनिवार और मंगलवार को इनका पाठ करने से विशेष पुण्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है.
सुंदरकांड का दोहा: बुराइयों से मुक्ति और सत्य के मार्ग की प्रेरणा
“काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ.
सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत॥”
इस दोहे में स्पष्ट संदेश दिया गया है कि काम, क्रोध, अहंकार, लोभ और लालच जैसे नकारात्मक भाव नरक की ओर ले जाने वाले मार्ग हैं. मनुष्य को इन बुराइयों का त्याग कर भगवान श्रीराम की भक्ति में लीन होना चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति का जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है और वह कभी गलत मार्ग पर नहीं जाता. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनिवार के दिन इस दोहे का पाठ विशेष लाभदायक होता है और यह व्यक्ति को शुद्ध विचारों व सदाचार की ओर प्रेरित करता है.
राम नाम की शक्ति: हर कठिनाई को आसान बनाने का सूत्र
“प्रबिसि नगर कीजे सब काजा. हृदय राखि कोसलपुर राजा॥
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई. गोपद सिंधु अनल सितलाई॥”
यह दोहा उस प्रसंग का है जब हनुमान जी लंका में प्रवेश करने वाले होते हैं. द्वारपालिका उनसे कहती है कि यदि वे अयोध्या के राजा श्रीराम को हृदय में रखकर आगे बढ़ेंगे, तो सभी कार्य सफल होंगे. इस दोहे का भाव है कि जो व्यक्ति अपने हर काम में भगवान राम का स्मरण रखता है, उसके लिए विष भी अमृत बन जाता है, शत्रु मित्र बन जाते हैं, और कठिनाइयाँ तुच्छ लगने लगती हैं. इस दोहे से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में किसी बड़े कार्य की शुरुआत से पहले श्रीराम का ध्यान करने से सफलता निश्चित होती है.
आध्यात्मिक संदेश और जीवन दर्शन
सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के ये दोहे केवल धार्मिक पाठ नहीं हैं, बल्कि ये जीवन जीने की कला सिखाते हैं. इनसे मनुष्य को यह संदेश मिलता है कि बुराइयों से दूर रहकर, सत्य, भक्ति और सद्गुणों के मार्ग पर चलना ही सच्ची सफलता और शांति का मार्ग है.
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