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गाजियाबाद/डेस्क: फाल्गुन माह की महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान शिव के मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. शिवभक्त मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत-उपवास कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं. मंदिरों और शिवालयों में 'हर-हर महादेव' के जयघोष गूंज रहे हैं. इस विशेष अवसर पर दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर की छटा देखते ही बन रही है. मान्यता है कि इस प्राचीन शिवधाम में सच्चे मन से अर्जी लगाने पर भक्तों के बिगड़े कार्य भी बन जाते हैं. यही कारण है कि महाशिवरात्रि पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
प्राचीनता और पौराणिक मान्यताएं
दूधेश्वरनाथ महादेव को शिव के अत्यंत प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है. जनश्रुति के अनुसार, यह स्थल लंकापति रावण के काल से जुड़ा है. कहा जाता है कि महर्षि पुलस्त्य के पुत्र और रावण के पिता विश्वश्रवा ने यहां कठोर तपस्या की थी. स्वयं रावण ने भी इस स्थान पर भगवान शिव की आराधना की थी. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, यहां प्रतिष्ठित हिरण्यगर्भ ज्योतिर्लिंग स्वयंभू रूप में लगभग साढ़े तीन फीट नीचे स्थित है. जिस हरनंदी नदी का उल्लेख मिलता है, उसे वर्तमान में हिंडन नदी के नाम से जाना जाता है.
ऐतिहासिक महत्व
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित इस मंदिर का मुख्य द्वार एक ही विशाल पत्थर को काटकर बनाया गया है. इसी पत्थर को तराशकर द्वार के मध्य भगवान गणेश की प्रतिमा उकेरी गई है. लोकमान्यता है कि इस भव्य मंदिर का निर्माण छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा करवाया गया था, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को और बढ़ाता है.
गाय से जुड़ी चमत्कारी कथा
मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, पास के कैला गांव की गायें चरते-चरते एक टीले पर पहुंच जाती थीं और वहां उनके थनों से स्वतः दूध बहने लगता था. ग्रामीणों ने जब आश्चर्यचकित होकर उस स्थान की खुदाई करवाई, तो वहां एक शिवलिंग प्रकट हुआ. चूंकि गायों के दूध से यहां शिवलिंग का अभिषेक हुआ, इसलिए इसका नाम दूधेश्वर या दुग्धेश्वर महादेव पड़ गया.
रंग बदलने वाला दिव्य कुआं
मंदिर परिसर में स्थित एक प्राचीन कुआं भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. मान्यता है कि इस कुएं का जल दिन में तीन बार रंग बदलता है. यह कुआं श्री दूधेश्वरनाथ मठ मंदिर के राम भवन में स्थित है, जहां गणेश-लक्ष्मी, अन्नपूर्णा और राधा-कृष्ण सहित कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं. दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु इस कुएं की पूजा करना नहीं भूलते. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. भक्तों का विश्वास है कि इस दिन सच्चे मन से की गई उपासना से भगवान शिव प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं.
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