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रांची/डेस्क: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 'कोल्ड्रिफ कफ सिरप' पीने से हुई 19 बच्चों की मौत के बाद 19 घरों की दुनिया उजड़ गई है. अपने मासूमों को खो चुके माता-पिता आज भी उस भयानक सदमे से बाहर नहीं निकल पा रहे, जब उन्होंने अपने ही हाथों से अपने बच्चों को जहरीला कफ सिरप पिलाया था. भले ही मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में इस सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया गया हो, लेकिन पीड़ित परिवारों की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं.
कफ सिरप समझ कर जहर दे दिया
इन 19 बच्चों में तीन साल 11 महीने का मासूम उसैद भी शामिल था. उसकी मां अफसाना की पीड़ा शब्दों से परे है. अफसाना ने रोते हुए बताया कि उन्होंने तो डॉक्टर की सलाह पर दवा दी थी. उन्होंने कहा, "मैंने उसे कफ सिरप समझ कर दवा दी. मुझे नहीं पता था कि यह जहर है. अगर मुझे पता होता, तो मैं उसे कभी नहीं देती. किसी को नहीं पता था कि यह दवा असल में जहर है."
गुस्साई मां ने सबको कड़ी सजा देने की मांग की
अफसाना ने बताया कि उनके बेटे में शुरुआत में सुधार के संकेत दिखे, लेकिन जल्द ही उसके हाथ-पैरों में सूजन आ गई. डॉक्टर ने उसकी हालत गंभीर बताई और छिंदवाड़ा के सिटी हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दी. वहां ठीक से इलाज न मिलने पर, अफसाना अपने बच्चे को नागपुर ले गईं. अफसाना ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि डॉक्टर और अस्पताल के कर्मचारियों से लेकर सिरप बनाने वाली दवा कंपनी तक, हर कोई इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार है. उन्होंने कहा, "हर कोई दोषी है. इस सिरप को बनाने वाली कंपनी सबसे ज़्यादा दोषी है. उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए." उन्होंने आगे बताया कि उनके बेटे को पहली बार 25 अगस्त को बुखार हुआ था, और वह 31 अगस्त को डॉक्टर के पास गईं. उन्होंने कहा, "हम उसे 6 सितंबर को नागपुर ले गए. यह सब सिर्फ़ एक-दो हफ्ते में हो गया." इस घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है.
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