निर्मला सीतारमण ने पेश की आर्थिक समीक्ष, भारत की GDP वृद्धि दर के 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान

निर्मला सीतारमण ने पेश की आर्थिक समीक्ष, भारत की GDP वृद्धि दर के 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान

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निर्मला सीतारमण ने पेश की आर्थिक समीक्ष भारत की gdp वृद्धि दर के 74 प्रतिशत रहने का अनुमान

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: 1 फरवरी को संसद में पेश होने वाले आम बजट से पहले केंद्रीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश किया. उन्होंने देश की विकसित हो रही अर्थव्यवस्था को रेखांकित करते हुए कहा कि उपभोग और निवेश के दोहरे इंजन से प्रेरित भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि यह लगातार चौथे वर्ष है जब भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है.

सीतारमण ने आर्थिक समीक्षा में वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर के 6.8-7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि भारत के लिए सम्भावित वृद्धि के लगभग 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

केन्द्रीय वित्तमंत्री ने समीक्षा में रेखांकित किया है कि कृषि और संबद्ध सेवाओं के वित्त वर्ष 2026 में 3.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है. वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में कृषि संबंधी गतिविधियों को अनुकूल मानसून से सहायता मिली. कृषि संबंधी जीवीए 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी जो वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में दर्ज 2.7 प्रतिशत वृद्धि दर से अधिक है लेकिन 4.5 प्रतिशत के दीर्घ अवधि औसत से कम है. संबद्ध कार्यकलापों, विशेष रूप से पशुधन एवं मत्स्य पालन में लगभग 5-6 प्रतिशत की अपेक्षाकृत स्थिर दर से वृद्धि हुई. चूंकि कृषि जीवीए में उनका हिस्सा बढ़ा है, कुल कृषि संबंधी वृद्धि ने निरंतर एक उतार चढ़ावपूर्ण फसल प्रदर्शन का एक भारित परिणाम और संबद्ध सेक्टरों में अपेक्षाकृत स्थिर विस्तार प्रदर्शित किया है.

आर्थिक समीक्षा में उल्लेख किया गया है कि औद्योगिक सेक्टर मजबूती के संकेत प्रदर्शित कर रहा है. विनिर्माण सेक्टर ने वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि प्रदर्शित की जो वित्त वर्ष 2026 के 7.0 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है. इसके अतिरिक्त निर्माण उद्योग गतिशील रहा है, जिसे निरंतर सार्वजनिक पूंजी व्यय और संरचना परियोजनाओं में जारी गति से मदद मिली. विनिर्माण सेक्टर का हिस्सा वास्तविक (स्थिर) मूल्य के हिसाब से 17-18 प्रतिशत पर मजबूत बना हुआ है. विनिर्माण का आउटपुट का सकल मूल्य (जीवीओ) सेवा क्षेत्र की तुलना में 38 प्रतिशत पर व्यापक रूप से स्थिर बना हुआ है. जिसे संकेत मिलता है कि आउटपुट में मजबूती जारी है. इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2026 में औद्योगिक सेक्टर के गति प्राप्त करने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 2025 के 5.9 प्रतिशत से अधिक 6.2 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. पीएमआई विनिर्माण, आईआईपी विनिर्माण और ई-वे बिल जनरेशन सहित वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतक मजबूत मांग के कारण विनिर्माण कार्यकलापों के सुदृढ़ीकरण का संकेत देते हैं. इस्पात उपभोग और सीमेंट उत्पाद जैसे निर्माण संकेतकों में निरंतर वृद्धि देखी गई है. आगे देखते हुए, जीएसटी के विवेकीकरण और अनुकूल मांग आउटलुक से प्रेरित औद्योगिक कार्यकलापों में गति के मजबूत बने रहने का अनुमान है.

आर्थिक समीक्षा में रेखांकित किया गया है कि आपूर्ति पक्ष पर, सेवा क्षेत्र विकास का मुख्य वाहक बना हुआ है. वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में सेवाओं के लिए सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए 9.1 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान था. यह रुझान सेक्टर के बीच व्यापक विस्तार का संकेत देता है. कोविड से व्यापक रूप से प्रभावित व्यापार, आतिथ्य, परिवहन, संचार एवं संबंधित सेवाओं को छोड़कर सेवा सेक्टर के भीतर सभी उप-श्रेणियों में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

आर्थिक समीक्षा में उल्लेख किया गया है कि मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय नरमी के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में मांग आधारित वृद्धि से वास्तविक क्रय शक्ति में सुधार आया है और उपभोग को मदद मिली है. वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल-दिसम्बर) में घरेलू मुद्रस्फीति खाद्य मूल्यों में तेज गिरावट का कारण कीमतों में व्यापक कमी प्रदर्शित करती है. हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति गिरकर 1.7 प्रतिशत पर आ गई जिसमें सब्जी और दलहन कीमतों में सुधार की मुख्य भूमिका थी. इसे अनुकूल कृषि स्थितियों, आपूर्ति पक्ष उपायों और एक मजबूत आधार से भी मदद मिली. जहां मुख्य मुद्रास्फीति दर में निरंतरता बनी रही है, यह बेशकीमती धातुओं की कीमतों में तेज वृद्धि से भी प्रभावित रहा है. इन्हें समायोजित करते हुए अंतर्निहित मुद्रास्फीति दबाव नरम प्रतीत होते हैं जिनसे सीमित मांग पक्ष तेजी का संकेत मिलता है. भविष्य के देखते हुए मुद्रास्फीति आउटलुक के नरम बने रहने की उम्मीद है जो अनुकूल आपूर्ति पक्ष स्थितियों और जीएसटी दर विवेकीकरण प्रभावी अवधि से समर्थित है.  

समीक्षा में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में देखी गई घरेलू मांग और पूंजी निर्माण में गति को एक विवेकपूर्ण राजकोषीय नीति, रणनीति का समर्थन मिला है जिसकी विशेषताओं में स्थिर राजस्व संग्रह और संयोजित विवेकपूर्ण व्यय शामिल हैं. वर्ष के दौरान सकल कर राजस्व संग्रह निरंतर गतिशील बना रहा है, प्रत्यक्ष कर संग्रह बजटीय वार्षिक लक्ष्य (नवम्बर, 2025 तक) का लगभग 53 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. अप्रत्यक्ष कर संग्रह भी निम्न मुद्रास्फीति दर और आयात में उतार चढ़ाव के बावजूद मजबूत बना रहा है. वर्ष के दौरान सकल जीएसटी संग्रह में कई बार सर्वकालिक ऊंचाई दर्ज की. व्यक्तिगत आय कर के पुनर्गठन और जीएसटी दरों के विवेकीकरण सहित हाल के कर नीति सुधारों ने उपभोग मांग में सहायता की है और राजस्व बनाए रखा है. व्यय पक्ष पर पूंजीगत परिव्ययों ने मजबूत वर्ष दर वर्ष वृद्धि दर्ज की और नवम्बर 2025 के बजट आवंटन के लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गया. इसके अतिरिक्त राजस्व व्यय में वृद्धि सीमित बनी रही जिससे सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता को मजबूती प्राप्त हुई.

आर्थिक समीक्षा में उल्लेख किया गया है कि वैश्विक व्यापार अनिश्चितता की पृष्ठभूमि में भारत का कुल निर्यात (वस्तु एवं सेवा) वित्त वर्ष 2025 में रिकार्ड 825.3 बिलियन डॉलर रहा और यह तेजी वित्त वर्ष 2026 में भी जारी है. अमेरिका द्वारा उच्चतर टैरिफ थोपे जाने के बावजूद वस्तु निर्यात में 2.4 प्रतिशत (अप्रैल-दिसम्बर 2025) की वृद्धि हुई जबकि सेवा निर्यात 6.5 प्रतिशत बढ़ा. अप्रैल-दिसम्बर, 2025 के लिए वस्तु आयात में 5.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई. पिछले वर्षों के रुझान को देखते हुए वस्तु व्यापार घाटा में वृद्धि की भरपाई सेवा क्षेत्र व्यापार अधिशेष में वृद्धि से होती रही है जबकि रेमिटेंस में वृद्धि से इस संतुलन को मजबूती मिली है. अधिकांश वर्षों में रेमिटेंस सकल एफडीआई आवक से अधिक रहे हैं जो बाह्य वित्त पोषण के एक प्रमुख स्रोत के रूप में अपने महत्व को रेखांकित करते हैं. इसके परिणामस्वरूप चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में जीडीपी के 0.8 प्रतिशत के नरम स्तर पर बना हुआ है.

केन्द्र सरकार की श्रम संहिता के कार्यान्वयन को अधिसूचित करने का ऐतिहासिक कदम नियामकीय संरचना में उल्लेखनीय सुधार का प्रमाण है. 29 केन्द्रीय कानूनों का चार श्रम संहिताओं में संघटन का उद्देश्य अनुपालन को सरल बनाना, श्रम बाजार लचीलेपन को बढ़ाना और श्रम बल की व्यापक श्रेणी को सुरक्षा प्रदान करना है. साथ ही मजदूरी, पेशागत सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना भी इसका लक्ष्य है.

वित्त वर्ष 2026 बाह्य मोर्च पर अर्थव्यवस्था के लिए असामान्य रूप से एक चुनौतीपूर्ण वर्ष था. वैश्विक व्यापार में अत्यधिक अनुश्चितता और उच्च, दण्डात्मक टैरिफ ने विनिर्माताओं, विशेष रूप से निर्यातको के लिए दबाव सृजित किया और व्यवसाय धारणा को प्रभावित किया. सरकार ने इस संकट का उपयोग जीएसटी युक्तीकरण, विनियमन पर त्वरित प्रगति और सभी सेक्टरों में अनुपालन आवश्यकताओं को और सरल बनाने जैसे प्रमुख उपायों के जरिए सुधार के अवसर के रूप में किया. इसलिए वित्त वर्ष 2027 के समायोजन का वर्ष रहने की उम्मीद है क्योंकि घरेलू मांग और निवेश के बढ़ने के साथ कम्पनियां और लोग खुद को इन बदलावों के अनुरूप ढालेंगे. इसके साथ-साथ यह भी स्वीकार किया जाना चाहिए कि बाहरी वातावरण अनिश्चित बना हुआ है जिससे समग्र परिदृश्य प्रभावित होता है.

महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसा लगता है कि पिछले कुछ वर्षों में नीतिगत सुधारों के संचयी प्रभावों ने अर्थव्यवस्था की मध्यकालिक विकास संभावना को 7 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. घरेलू वाहकों के प्रमुख भूमिका निभाने और वृहद आर्थिक स्थिरता के मजबूत होने के साथ विकास के आसपास जोखिमों का संतुलन व्यापक रूप से सम बना हुआ है. इन सभी विचारों के साथ, आर्थिक समीक्षा वित्त वर्ष 2027 में 6.8 से 7.2 प्रतिशत के दायरे में वास्तविक जीडीपी विकास अनुमान व्यक्त करता है. इसलिए यह अनुमान वैश्विक आवश्यकता के बीच एक निरंतर वृद्धि  का संकेत है जिसके लिए सावधानी बरतने की आवश्यकता है, निराश होने की नहीं.

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